ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रौशन आनंद जेल से रिहा हो गए। बाहर आते ही उनका खान सर उर्फ फैजल खान के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। बाहर आने के बाद उन्होंने अपने भाई की मौत को लेकर बड़ा बयान दिया। खान सर सहित दो लोगों पर हत्या करवाने का गंभीर आरोप लगाया।
खान सर और किसान कोल्ड स्टोर के मालिक पर गंभीर आरोप
राजधानी पटना के मुसल्लहपुर में खान ग्लोबल स्टडीज पर तोड़फोड़ और फायरिंग मामले में गिरफ्तार ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर रौशन आनंद सर बेऊर जेल से बेल मिलने के बाद बाहर निकले। रौशन आनंद ने जेल से बाहर निकलने के बाद मीडिया के सामने दावा किया है कि ‘खान सर उर्फ फैजल खान और किसान कोल्ड स्टोर के मालिक आरएस प्रसाद ने षडयंत्र रचकर हमारे भाई की हत्या करवाई है। मेरी भी हत्या करवा सकते हैं, जेल में मेरी हत्या की कोशिश की गई।
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग
रौशन आनंद ने कहा कि फैजल खान ने इस मामले में झूठ बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि 2 जून को हुई फायरिंग खान सर की तरफ से कराई गई थी, लेकिन बाद में पूरे मामले को दूसरी दिशा देने की कोशिश की गई। रौशन आनंद ने कहा कि सच्चाई सामने आए, इसके लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है।
तेज प्रताप यादव ने भी खान सर पर लगाए थे आरोप
वहीं, लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल के चीफ तेज प्रताप यादव ने प्रिंस की मौत का साजिशकर्ता फैजल खान उर्फ खान सर को बताया। तेज प्रताप ने कहा, “हम तो यह कहेंगे कि यह बहुत दुखद घटना है। इस तरह की घटना नहीं होनी चाहिए थी। अगर इसमें किसी पर इल्जाम लगाएंगे तो हम खान सर पर लगाएंगे, क्योंकि इन्होंने ही हत्या कराने का काम किया है।”
कैसे हुई प्रिंस यादव की मौत?
बता दें कि रौशन आनंद के भाई की मौत नेपाल में हुई है। मौत का कारण पता नहीं चला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही कुछ पता चलेगा। इस मामले में उसके दोस्त का एक बयान वायरल हो रहा है। उसमें दोस्त का कहना है कि ‘हमलोग घूमने आए थे। प्रिंस को पहले से घबराहट और मानसिक बीमारी की दवाइयां चल रही थीं। बीच में उसने दवाएं लेनी बंद कर दी थीं। हाल में वो फिर से दवाएं लेने लगा था और ठीक हो गया था। उसकी मौत के दिन भी उसने दवा खाई और आराम से सो गया। हम उसे छोड़ कर बाहर निकले। एक दोस्त ने तभी फोन किया कि प्रिंस की हालत ठीक नहीं लग रही। हम वापस लौटे तो देखा कि प्रिंस जोर से सांस ले रहा था। हम उसे अस्पताल ले गए। लेकिन उसकी मौत हो गई। हम उसे क्यों मारेंगे? अपने ही प्रिय दोस्त को हम क्यों मारेंगे?’

