डिजिटल डेस्क/जमशेदपुर:भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और विस्तार के बीच देश की दिग्गज स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील ने एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। कंपनी अब खुद को सिर्फ एक पारंपरिक स्टील आपूर्तिकर्ता के रूप में सीमित नहीं रख रही है, बल्कि रेलवे के हाई-टेक कोच इंटीरियर, सस्टेनेबल इन्फ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स समाधानों में सीधे तौर पर उतर चुकी है। इस नई रणनीति के तहत कंपनी रेलवे क्षेत्र में अपनी बाजार हिस्सेदारी को मौजूदा 15-20% से बढ़ाकर 25-30% करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य पर काम कर रही है।
वंदे भारत एक्सप्रेस के पहियों और सिटिंग सिस्टम पर रेलवे से बातचीत
टाटा स्टील भविष्य में वंदे भारत जैसी अत्याधुनिक और सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों के लिए कम घिसाव वाले विशेष पहियों के निर्माण पर विचार कर रही है। इसे लेकर रेलवे के साथ उच्च स्तरीय बातचीत शुरू हो चुकी है। इससे पहले कंपनी ने वंदे भारत एक्सप्रेस की 22 ट्रेनों के लिए सिटिंग सिस्टम और इंटीरियर पैनलिंग की आपूर्ति का एक बड़ा अनुबंध पहले ही हासिल कर लिया है। इसके अलावा टाटा स्टील कोच निर्माण में पारंपरिक स्टील के स्थान पर फाइबर रीइन्फोर्स्ड पॉलीमर का उपयोग कर रही है। एफआरपी बेहद हल्का, जंगरोधी और सुरक्षा के लिहाज से अधिक मजबूत माना जाता है, जिससे ट्रेनों की गति और सुरक्षा दोनों में सुधार होगा। साथ ही, टाटानगर में 384 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित वंदे भारत मेंटेनेंस डिपो, रेलवे और टाटा स्टील के बीच बढ़ते गहरे तालमेल को दर्शाता है।
पर्यावरण अनुकूल पहल: टाटा एग्रिटो और टाटा निर्माण
टाटा स्टील और दक्षिण पूर्व रेलवे ने मिलकर एक नई सस्टेनेबल पहल की है। इसके तहत कंपनी टाटा एग्रिटो और टाटा निर्माण जैसे स्लैग-आधारित एग्रीगेट्स का उपयोग करके रेलवे ट्रैक की परतें (ब्लैंकेटिंग लेयर) बना रही है। यह कदम प्राकृतिक संसाधनों के खनन को कम करने और कार्बन फुटप्रिंट को घटाने में बेहद मददगार साबित हो रहा है।
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में 65% हिस्सेदारी
भारत की पहली 508 किलोमीटर लंबी मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड पैसेंजर रेलवे लाइन (बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट) में टाटा स्टील एक गेम-चेंजर की भूमिका निभा रही है। इस परियोजना में कंपनी की सहायक इकाई टाटा स्टील ग्लोबल वायर्स इंडिया ने 4200 टन सुपर स्ट्रक्चर वाले लो रिलैक्सेशन प्रीस्ट्रेस्ड कंक्रीट स्ट्रैंड्स की आपूर्ति की है। एलआरपीसी स्ट्रैंड्स का उपयोग प्रीस्ट्रेस्ड टेक्नोलॉजी द्वारा किया गया है, जो न केवल संरचना को मजबूती देता है बल्कि कंक्रीट की खपत और कुल लागत को 15 प्रतिशत तक कम करता है। इस एडवांस स्टील के इस्तेमाल से प्रोजेक्ट पूरा होने के समय और मैनपावर में 20-20 प्रतिशत की भारी बचत हो रही है, जबकि निर्माण की गति में 30 प्रतिशत की तेजी आई है। इस पूरे बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में टाटा स्टील ग्लोबल वायर्स लिमिटेड की अकेले 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है। मुंबई-अहमदाबाद के बीच इस बुलेट ट्रेन के चलने से यात्रा का समय घटकर मात्र 2 घंटे रह जाएगा।
लॉजिस्टिक्स लागत कम करने के लिए SFTO योजना और ग्लोबल रीच
टाटा स्टील रेलवे की विशेष मालगाड़ी परिचालक SFTO योजना के तहत अपने स्वयं के वैगन व रैक का उपयोग कर रही है। इस कदम से कंपनी की लॉजिस्टिक्स लागत में भारी कमी आई है और माल ढुलाई अधिक कुशल हुई है। कंपनी की इंजीनियरिंग गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि टाटा स्टील द्वारा बनाई गई पटरियों का उपयोग आज ब्रिटेन के रेलवे नेटवर्क में भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है, जो वैश्विक स्तर पर कंपनी की साख का बड़ा प्रमाण है।

