राम मंदिर की दान पेटी से कथित चोरी और अनियमितता के मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) की रिपोर्ट आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जा सकती है। बताया जा रहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट पहले सात दिनों के भीतर सौंपनी थी, लेकिन रिपोर्ट में कुछ तकनीकी और तथ्यात्मक खामियों के कारण इसमें देरी हुई।
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी की रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की भूमिका को लेकर कोई प्रत्यक्ष संलिप्तता नहीं पाई गई है। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि दान राशि की गणना में लगे कुछ सेवादारों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। आधिकारिक तौर पर अभी तक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री को रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई शुरू होगी और यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जा सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि विस्तृत जांच के लिए एसआईटी की टीम दोबारा अयोध्या जा सकती है। इस दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से आरोप लगाने वाले लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है और उनसे संबंधित साक्ष्य मांगे जा सकते हैं।
इधर, दान की राशि की गणना में लगे सभी पुराने कर्मचारियों को हटा दिया गया है। बताया जा रहा है कि करीब 35 से 40 लोग इस कार्य में लगे थे, जिनमें से अधिकांश की भूमिका जांच के दायरे में है। अब बैंक की ओर से नए कर्मचारियों की तैनाती की गई है और चढ़ावे की गिनती सख्त निगरानी में कराई जा रही है।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दल लगातार सरकार और मंदिर प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री को सौंपी जाने वाली एसआईटी रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

