राज्यसभा में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ NDA की ताकत बढ़कर 141 सांसदों तक पहुंच गई है। इससे उच्च सदन में सरकार की स्थिति पहले से अधिक मजबूत हुई है और संविधान संशोधन समेत कई अहम विधेयकों को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, संविधान संशोधन के लिए केवल राज्यसभा में मजबूत संख्या पर्याप्त नहीं है, क्योंकि इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत अनिवार्य होता है।
वर्तमान में 242 सदस्यों वाली राज्यसभा में एनडीए के पास 141 सांसद हैं। इसके अलावा सरकार को 10 नामांकित और निर्दलीय सांसदों का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार का भरोसेमंद आंकड़ा 151 तक पहुंच जाता है, जो साधारण बहुमत के लिए जरूरी संख्या से काफी अधिक है। हालांकि, राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक आंकड़े से एनडीए अभी भी 11 सीट पीछे है।
राज्यसभा के मौजूदा समीकरण में बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। बीजेडी के 5 और वाईएसआरसीपी के 4 सांसद हैं। ये दोनों दल न तो एनडीए का हिस्सा हैं और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन में शामिल हैं, लेकिन अतीत में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर दोनों दल केंद्र सरकार का समर्थन कर चुके हैं। यदि इन 9 सांसदों का साथ सरकार को मिलता है तो राज्यसभा में एनडीए की संख्या बढ़कर 160 तक पहुंच सकती है।
इसके अलावा पश्चिम बंगाल की तीन रिक्त राज्यसभा सीटों पर जल्द उपचुनाव होने हैं। राज्य विधानसभा में मौजूदा राजनीतिक स्थिति को देखते हुए इन सीटों पर भाजपा के बेहतर प्रदर्शन की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो एनडीए का आंकड़ा बढ़कर 163 तक पहुंच सकता है।
राजनीतिक गलियारों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) में संभावित टूट की भी चर्चा है। बागी नेताओं का दावा है कि आने वाले समय में पार्टी के कुछ और राज्यसभा सांसद इस्तीफा दे सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो 245 सदस्यीय राज्यसभा में संविधान संशोधन के लिए जरूरी 164 के दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े तक पहुंचना एनडीए के लिए और आसान हो सकता है।
हालांकि, राज्यसभा में स्थिति मजबूत होने के बावजूद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अभी भी लोकसभा में बनी हुई है। संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए लोकसभा और राज्यसभा, दोनों में मौजूद एवं मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन के साथ-साथ सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत भी आवश्यक होता है।
इस बीच विपक्षी गठबंधन INDIA के भीतर भी राजनीतिक हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस में बगावत और तमिलनाडु में DMK तथा कांग्रेस के संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं ने विपक्ष की एकजुटता पर सवाल खड़े किए हैं। यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय और शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी देते हैं, तो लोकसभा में भी एनडीए की ताकत बढ़ सकती है। हालांकि, इसके बावजूद 540 सदस्यीय लोकसभा में संविधान संशोधन के लिए जरूरी 360 सांसदों के समर्थन का आंकड़ा हासिल करना सरकार के लिए अब भी आसान नहीं माना जा रहा है।

