भरत तिवारी एनकाउंटर के आरोपी डीएसपी की पोस्टिंग पर भड़कीं रोहिणी आचार्य, कहा-ये फर्जी एनकाउंटर का इनाम

Neelam
By Neelam
3 Min Read

भरत तिवारी एनकाउंटर केस में सम्राट चौधरी सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर है। राजद अध्यक्ष लालू यादव की पुत्री रोहिणी आचार्य ने भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी कथित फर्जी एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार सरकार पर निशाना साधा है।

आरोपी अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपने पर बोला हमला

भरत तिवारी के एनकाउंटर को लेकर हुए विवाद के बाद एसडीपीओ राजेश शर्मा पर एफआईआर हुई थी। हालांकि उसी अधिकारी को नई पोस्टिंग मिल गई है। जिसको लेकर एक बार फिर सम्राट सरकार की कार्यशैली सवालों के घेरे में है। राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने इस मामले में आरोपी जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा को नई जिम्मेदारी सौंपे जाने को लेकर सरकार पर हमला बोला है। 

सरकार के फैसले को बताया हैरान करने वाला

रोहिणी आचार्य ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि जवईनिया गांव के गरीब विस्थापितों की लड़ाई लड़ने वाले और भोजपुर प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करने की बात करने वाले भरत तिवारी की कथित फर्जी पुलिस मुठभेड़ में हत्या के मामले में नामजद आरोपी पुलिस अधिकारी को नई जिम्मेदारी सौंपा जाना हैरान करने वाला फैसला है।

आरोपी अधिकारी को पुरस्कृत करने जैसा-रोहिणी

रोहिणी आचार्य ने कहा कि यह कदम आरोपी अधिकारी को पुरस्कृत किए जाने के समान है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इस फैसले से मृतक के परिजनों और ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों को बल मिलता है कि कथित फर्जी मुठभेड़ को सत्ता के शीर्ष स्तर, पुलिस के उच्चाधिकारियों और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की सहमति प्राप्त थी।

रोहिणी आचार्य के तीखे सवाल 

पोस्ट के माध्यम से रोहिणी आचार्य ने सवाल खड़े किए हैं। बिहार के मुख्यमंत्री, बिहार सरकार व बिहार के डीजीपी के साथ-साथ बिहार की जनता से उन्होंने सवाल किया है। 

 मृतक के परिजनों के द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर में लगभग आधा दर्जन पुकिसकर्मियों को नामजद आरोपी बनाए जाने के बावजूद उनमें से अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई है?

 नामजद आरोपियों से अब तक कोई पूछताछ क्यों नहीं की गई है?

 मामले की जांच की गति इतनी धीमी क्यों है और जांच की प्रक्रिया में पारदर्शिता क्यों नहीं बरती जा रही है?

 क्या आरोपी पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किए जाने, धीमी व ढुलमुल जांच का मकसद फर्जी मुठभेड़ का आदेश देने वाले ‘किसी बड़े नाम’ को बचाना है?

पूर्व में भी मेरे और मृतक के परिजनों के द्वारा उठाया गया अहम सवाल यथावत है कि मृतक का मोबाइल फोन कहां है? लगभग एक पखवारा बीत जाने के बाद भी पुलिस के द्वारा मोबाइल फोन अब तक परिजनों को क्यों नहीं सौंपा गया है?

Share This Article