डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर:कोल्हान क्षेत्र में रेलवे ट्रैक और बिजली के तारों की चपेट में आकर होने वाली हाथियों की दर्दनाक मौतों पर अब पूरी तरह से लगाम कसने की तैयारी हो चुकी है। वन्यजीवों को इन हादसों से सुरक्षित रखने के लिए रेलवे और वन विभाग ने हाथ मिलाया है। दोनों विभागों ने मिलकर एक ऐसी संयुक्त रणनीति तैयार की है, जिसमें अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर हाथियों की 24 घंटे ई-निगरानी की जाएगी।
कैसे काम करेगी यह AI तकनीक?
संवेदनशील रेल खंडों पर अब इंसानी चौकसी के साथ-साथ डिजिटल आंखें भी पहरा देंगी। इसके लिए ट्रैक के आसपास ई-निगरानी टावर लगाए जा रहे हैं। ये टावर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित IDS तकनीक, फाइबर ऑप्टिक्स,
थर्मल इमेजिंग कैमरे (जो रात के अंधेरे में भी हाथियों की मूवमेंट पकड़ सकेंगे) इन आधुनिक तकनीकों से लैस होंगे।
1 किलोमीटर पहले ही रुक जाएगी ट्रेन: इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जैसे ही कोई हाथी रेलवे ट्रैक के 1 किलोमीटर के दायरे में आएगा, वैसे ही ट्रेन के लोको पायलट (ड्राइवर) और स्टेशन कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिल जाएगा। समय रहते अलर्ट मिलने से लोको पायलट ट्रेन की गति को कम कर सकेंगे, जिससे संभावित हादसा टल जाएगा।
सिर्फ तकनीक ही नहीं, ग्राउंड पर भी हो रहा काम
हाथियों के पारंपरिक रास्तों (एलीफेंट कॉरिडोर) को सुरक्षित बनाने के लिए ग्राउंड लेवल पर भी कई बड़े बदलाव किए जा रहे हैं।
अंडरपास और रैंप: हाथियों के आसानी से निकलने के लिए अंडरपास और रैंप का निर्माण किया जा रहा है।
फेंसिंग और झाड़ियों की सफाई: ट्रैक के आसपास फेंसिंग की जा रही है और झाड़ियों को साफ किया जा रहा है ताकि दूर से ही विजिबिलिटी साफ रहे।
ड्रोन और जॉइंट पेट्रोलिंग: वन विभाग और रेलवे के बीच रियल-टाइम सूचना साझा करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा, ड्रोन से निगरानी और दोनों विभागों की संयुक्त गश्ती (जॉइंट पेट्रोलिंग) भी शुरू की गई है।

