एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी पर तालाबंदी की तलवार: झींकपानी में भारी आक्रोश, गेट पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू

Manju
By Manju
3 Min Read

डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: पश्चिमी सिंहभूम के झींकपानी में स्थित एसीसी अडानी सीमेंट कंपनी को 16 अगस्त से बंद करने के फैसले ने तूल पकड़ लिया है। इस प्रस्तावित तालाबंदी के खिलाफ मंगलवार से स्थानीय मजदूरों, ग्रामीणों और छोटे दुकानदारों ने एकजुट होकर कंपनी के मुख्य गेट पर मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रबंधन भारी मुनाफे के चक्कर में स्थायी रोजगार को खत्म कर आउटसोर्सिंग और मशीनीकरण थोपने की साजिश रच रहा है।

​’वेज बोर्ड’ खत्म करने की साजिश, 17 अगस्त को जिला बंद की चेतावनी
​धरना का नेतृत्व कर रहे झारखंड जेनरल कामगार यूनियन के केंद्रीय अध्यक्ष जॉन मीरां मुंडा ने सीधे तौर पर कंपनी प्रबंधन की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कंपनी सुनियोजित तरीके से सीमेंट वेज बोर्ड व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहती है। स्थायी मजदूरों की जगह ठेका श्रमिकों से काम लेने की तैयारी है, ताकि उन्हें वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं से वंचित किया जा सके। प्रबंधन केवल और केवल अधिक मुनाफा कमाने के लिए कर्मचारियों के अधिकारों का गला घोंट रहा है। यूनियन नेताओं ने साफ कर दिया है कि अगर 16 अगस्त को कंपनी बंद की गई तो 17 अगस्त को पूरे पश्चिमी सिंहभूम जिले में ऐतिहासिक बंद का आह्वान किया जाएगा। आंदोलन को धार देने के लिए अब प्रभावित गांवों में लगातार नुक्कड़ सभाएं की जाएंगी।

इन 5 मुख्य मांगों पर अड़ा यूनियन (सौंपा मांगपत्र)
​प्रदर्शन के दौरान यूनियन ने कंपनी प्रबंधन को एक पांच सूत्री मांगपत्र सौंपा है। साथ ही इसकी एक-एक प्रति प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री को भी भेजी गई है।
सुविधाएं रहें बहाल: सीमेंट वेज बोर्ड के तहत मिलने वाली सभी सुविधाएं मजदूरों को मिलती रहें।
आउटसोर्सिंग का विरोध: स्थायी मजदूरों की जगह ठेका प्रथा से काम कराने की नीति पर तुरंत रोक लगे।
25 साल के घोटाले की जांच: वर्ष 2001 से 2026 तक के कथित पीएफ घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो।
कैंटीन सेवा चालू हो: प्रबंधन द्वारा बंद की गई कैंटीन सेवा को तत्काल दोबारा शुरू किया जाए।
बिजली-पानी पर रोक न लगे: कंपनी परिसर में दी जा रही बिजली और पानी की आपूर्ति को किसी भी हाल में बंद न किया जाए।

​मजदूरों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन ने दमनकारी नीति अपनाते हुए पहले ही कैंटीन बंद कर दी है, जिससे कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है। अब आर-पार की लड़ाई के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।

Share This Article