क्या संविधान और सुप्रीम कोर्ट से ऊपर है भाजपा और NDA? रोहिणी आचार्य का बड़ा सवाल

Neelam
By Neelam
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बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश को लेकर संवैधानिक विवाद सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) की अध्यक्षता वाली बेंच ने इस याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाया है और मामले की सुनवाई के लिए मंगलवार का दिन तय किया है। दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सरकार पर जोरदार हमला बोला है।

केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार से मांगा जवाब

दीपक प्रकाश के पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने भाजपा और एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर केंद्र और बिहार की एनडीए सरकार से संवैधानिक जवाब मांगा है।

रोहिणी ने पूछा- क्या संविधान से ऊपर है भाजपा और एनडीए?

रोहिणी आचार्य ने अपने पोस्ट में लिखा कि क्या संविधान, सर्वोच्च न्यायालय से ऊपर है भाजपा और एनडीए? उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा यह सवाल उठाया जाना कि कोई व्यक्ति छह महीने तक बिना विधायक या एमएलसी बने मंत्री पद पर कैसे रह सकता है, यह एनडीए सरकार की संवैधानिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व वाली सरकार को इस मामले पर तत्काल स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर संवैधानिक प्रावधानों और सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ा हुआ है।

इस केस का हवाला देकर एनडीए को घेरा

रोहिणी आचार्य ने कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए सवाल किया। उन्होंने लिखा है कि एसआर. चौधरी बनाम पंजाब राज्य (2001) मामले में माननीय सर्वोच्च अदालत का स्पष्ट आदेश है कि 6 महीने की सीमा को किसी भी राजनीतिक पैंतरेबाज़ी से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता है। बावजूद इसके भाजपा नीत सरकार में दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर कब्ज़ा जमा कर बैठने से, यही साबित होता है कि भाजपा हमेशा से खुद को और खुद की सत्ता व सरकार को संविधान से ऊपर मानती-समझती रही हैl

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से मांगा जवाब

इससे पहले, गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में बिहार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने बिहार सरकार से सवाल किया कि जब दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य, तो वह छह महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर कैसे बने हुए हैं?

दीपक प्रकाश के मामले में विवाद क्या है?

दीपक प्रकाश ने 20 नवंबर 2025 को मंत्री पद की शपथ ली थी। उस समय वह न विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य। इस हिसाब से उन्हें 20 मई 2026 तक किसी एक सदन का सदस्य बन जाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसी बीच बिहार में राजनीतिक बदलाव हुआ। नीतीश कुमार सरकार हट गई और 7 मई 2026 को सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनी। इस नई सरकार में दीपक प्रकाश को फिर मंत्री बना दिया गया। अब विवाद इस बात पर है कि क्या नई सरकार बनने से अनुच्छेद 164(4) के तहत मिलने वाले छह महीने दोबारा शुरू हो जाते हैं?

क्या कहता है संविधान का अनुच्छेद 164(4)?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 164(4) राज्यों के मंत्रियों से जुड़ा है। इसमें साफ लिखा है कि यदि कोई व्यक्ति मंत्री नियुक्त होता है, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य नहीं है, तो उसे छह महीने के भीतर किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा। अगर वह छह महीने के भीतर निर्वाचित या मनोनीत नहीं होता है तो उस व्यक्ति मंत्री पद छोड़ना होगा। संविधान इस अवधि को बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं देता।

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