जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के 7 साल पूरे हो गए हैं। आज से ठीक सात साल पहले 5 अगस्त, 2019 को देश की नरेन्द्र मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर के विकास और प्रगति में बाधा बन बैठे संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए के तहत मिलने वाले विशेष दर्जे को खत्म कर दिया था। बीते सात वर्षों से जम्मू-कश्मीर एक केंद्र शासित प्रदेश है। केंद्र सरकार के फैसले के बाद पिछते सात वर्षों में हालात काफी बदल गए हैं।
अनुच्छेद 370 हटाना मोदी सरकार का ऐतिहासिक फैसला
अनुच्छेद 370 का मसला भारत की आजादी के साथ ही शुरू हुआ था। 1948 में जम्मू-कश्मीर के राजा हरि सिंह ने भारत में विलय से पहले विशेषाधिकार की शर्त रखी थी। जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा होने के बाद भी अलग ही रहा। राज्य का अपना अलग संविधान बना। वहां भारत के कुछ ही कानून लागू होते थे। 2019 में चुनाव जीतने के बाद मोदी सरकार ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 खत्म कर दिया।
बदल गई घाटी की फीजा
केन्द्र सरकार ने अनुच्छेद 370 और 35ए को समाप्त करने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अलग कर दो केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में मान्यता दी थी और दोनों प्रदेशों की सुरक्षा और विकास की जिम्मेदारी को सीधे अपने हाथों में ले लिया था। इन बीते सात सालों में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की फिजा बदल चुकी है। जिस घाटी में कभी बंद, कर्फ्यू और पत्थरबाजी का सन्नाटा रहता था, आज वहां के युवा अब नई उम्मीदों की गूंज से चहक रहे हैं। सुरक्षा, शांति और विकास के इस नए दौर में स्थानीय जनता अब अलगाववाद को पीछे छोड़ अपने सपनों को नई उड़ान दे रही है।
लाल चौक की तस्वीर बदली
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, 5 अगस्त 2019 के बाद से घाटी का माहौल काफी बदला है। श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चौक पर, जहां कभी अलगाववादी गतिविधियां दिखती थीं, आज देश-विदेश से आने वाले पर्यटक बेझिझक तिरंगा फहरा रहे हैं, रील्स बना रहे हैं और तस्वीरें खींच रहे हैं। धार्मिक यात्राएं और जन्माष्टमी की झांकियां भी अब शांतिपूर्ण माहौल में निकाली जा रही हैं।
पत्थरबाजी पर लगा लगाम
आज से सात साल पहले हड़तालों, बंद और कर्फ्यू का दंश आम जनता को झेलना पड़ता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 से 95 प्रतिशत तक की कमी आई है। पहले अलगाववादी सोच की वजह से जम्मू-कश्मीर के आम लोगों को शटडाउन, हड़ताल और कर्फ्यू का सामना करना पड़ता था। अलगाववादियों ने घाटी के युवाओं को हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर आतंकवाद की ओर धकेला। अनुच्छेद 370 हटने के बाद युवा अलगावादियों की चंगुल से मुक्त हो गए हैं।
पाकिस्तान परस्तों और अलगाववादियों पर शिकंजा
बदलावों के बीच ही सरकार ने पाकिस्तान परस्त लोगों पर जबर्दस्त शिकंजा कसा। अलगाववादियों, आतंकवादियों से साठगांठ और पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों को बर्खास्त करना शुरू किया। इसी कड़ी में हिजबुल मुजाहिदीन सरगना सैयद सलाहुद्दीन के दो बेटों की सरकारी सेवा समाप्त कर दी गई। हिजबुल आतंकी के साथ गिरफ्तार डीएसपी दविंदर सिंह को भी बर्खास्त कर दिया गया।
आतंकियों का सफाया हो रहा
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद से लगभग हर दिन आतंकियों के लिए काल साबित हो रहा है। पिछले दो वर्षों में घाटी में 130 टॉप कमांडरों समेत 459 आतंकियों को मार गिराने में सुरक्षाबलों को सफलता प्राप्त हुई है। सुरक्षाबलों की सख्ती से 149 आतंकियों ने या तो सरेंडर किया है या वे जिंदा पकडे़ गए हैं।
आर्थिक विकास की ओर बढ़ी जम्मू-कश्मीर
केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले ने जम्मू-कश्मीर की जनता के रोजमर्रा की जिंदगी में एक सकारात्मक बदलाव लेकर आया है। आज स्थानीय समुदायों के लिए यहीं आजीविका के नए मौके बने हैं, पर्यटन के क्षेत्र में सुधार की वजह से केंद्र शासित प्रदेश के साथ-साथ यहां की जनता का भी आर्थिक विकास हुआ है।

