डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर एक बड़े अभियान की रूपरेखा तैयार की गई है। राज्य में आगामी 17 सितंबर से लेकर 10 अक्टूबर तक विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिनका मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं के दायरे को बढ़ाना और आम जनता तक सीधी पहुंच बनाना है। राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ से मिली जानकारी के अनुसार, इस अवधि के दौरान मुख्य रूप से दो बड़े अभियानों—’सेवा संकल्प अभियान’ और ‘आंगन का उत्सव’ का संचालन होगा। इसके तहत सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के घरों तक पहुंच कर विशेष गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
घर-घर पहुंचेंगे ‘आशीर्वाद के दीप’
‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत कार्यकर्ताओं और प्रशासन द्वारा लाभार्थियों के घरों में जाकर दीप प्रज्वलित किए जाएंगे, जिसे ‘आशीर्वाद के दीप’ नाम दिया गया है। इस पहल को वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प और जनसेवा के रूप में प्रचारित किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत बूथ स्तर पर संपर्क साधकर केंद्र और राज्य दोनों सरकारों की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी घर-घर पहुंचाई जाएगी। दूसरी ओर, ‘आंगन का उत्सव’ कार्यक्रम समाज के वंचित तबके के उत्थान और महिला सशक्तिकरण को समर्पित होगा। इसके जरिए स्वास्थ्य और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं, विशेषकर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया जाएगा।
युवाओं की भागीदारी और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन
व्यापक जन-भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को भी इस अभियान से जोड़ा गया है। स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रधानमंत्री के सेवा कार्यों और ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण पर आधारित चित्रकला और भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा, जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। जिनमें नुक्कड़ नाटक, पदयात्रा और बाइक रैलियां, आम नागरिकों के लिए स्वास्थ्य जांच शिविर और रक्तदान शिविर
विभिन्न प्रखंडों में ‘सेवा सेतु’ शिविर, जहां लोग सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए ऑन-स्पॉट पंजीकरण करा सकेंगे।
स्थानीय प्रशासन को इन आयोजनों के लिए उपयुक्त स्थानों और आंगनबाड़ी केंद्रों की पहचान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। साथ ही, स्वास्थ्यकर्मियों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद से लाभार्थी महिलाओं और बच्चों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है ताकि इन कार्यक्रमों का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंच सके।

