डिजिटल डेस्क।मिरर मीडिया: चाचा-भतीजे के रिश्ते को कलंकित करने वाली एक सनसनीखेज घटना झारखंड के बंदगांव से सामने आई है, जहां महज कुछ पैसों के विवाद ने एक खूनी खेल का रूप ले लिया। पैसों के लेन-देन को लेकर हुए आपसी झगड़े में 19 वर्षीय भतीजे ने लोहे की रॉड से हमला कर अपने ही चाचा की निर्मम हत्या कर दी। बंदगांव थाना पुलिस ने महज दो दिनों के भीतर इस अंधे हत्याकांड का खुलासा करते हुए आरोपी भतीजे को सलाखों के पीछे भेज दिया है।
चक्रधरपुर थाना प्रभारी अवधेश कुमार ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाते हुए बताया कि 6 सितंबर को बिरसा ओड़ेया का शव बरामद होने के बाद पुलिस ने बंदगांव थाने में कांड संख्या 13/2026 दर्ज कर जांच शुरू की थी। गहनता से की गई तफ्तीश के बाद पुलिस तब हैरान रह गई जब इस हत्या के पीछे किसी बाहरी का नहीं, बल्कि मृतक के अपने भतीजे 19 वर्षीय बिमल ओड़ेया का हाथ होने का सबूत मिला। आरोपी मूल रूप से बंदगांव के अंगरिया गांव का रहने वाला है।
जंगल में की गई थी खौफनाक वारदात
पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई कि 5 सितंबर की रात करीब 9 से 10 बजे के बीच खरवां गांव के पास स्थित जंगल की सड़क के किनारे बिमल ने अपने चाचा बिरसा ओड़ेया को रोका। पैसों की वापसी को लेकर दोनों के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद गुस्से में आकर बिमल ने लोहे की रॉड से चाचा के सिर पर ताबड़तोड़ वार कर दिए। जब बिरसा जमीन पर गिर पड़े, तो आरोपी ने उसी रॉड से उनका गला घोंटकर उनकी सांसें हमेशा के लिए थाम दी।
पुलिस की मुस्तैदी से दो दिन में हुआ पर्दाफाश
घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया था और पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था। हालांकि, बंदगांव थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तकनीकी साक्ष्यों और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से आरोपी बिमल ओड़ेया को धर दबोचा। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने वारदात के दौरान पहने गए खून से सने कपड़े और मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए हैं। सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। इस मर्डर मिस्ट्री को सुलझाने वाली पुलिस टीम में बंदगांव थाना प्रभारी पवन कुमार चौधरी, सब-इंस्पेक्टर नारायण तुबिद, धिरेन्द्र देव मनीषी, असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर धिरेन्द्र कुमार सिंह और अन्य सशस्त्र बल के जवान शामिल रहे।

