जमशेदपुर के भविष्य पर टिकी निगाहें: सुप्रीम कोर्ट में टला बहुचर्चित फैसला, जानें क्या है पूरा कानूनी विवाद

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर :जमशेदपुर में नगर निगम के गठन और इसे औद्योगिक टाउनशिप घोषित करने के फैसले से जुड़े बहुचर्चित कानूनी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई टल गई है। समय की कमी के चलते अदालत इस मामले पर विचार नहीं कर सकी, और अब जल्द ही सुनवाई के लिए एक नई तिथि निर्धारित की जाएगी।

क्या है पूरा मामला?
​याचिकाकर्ता की दलील: जमशेदपुर के सामाजिक कार्यकर्ता जवाहरलाल शर्मा ने इस मामले को लेकर रिट याचिका (सिविल संख्या 483/2025) दायर की है। याचिका में राज्य सरकार द्वारा 28 दिसंबर 2023 को जारी की गई उस अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जिसके तहत शहर को औद्योगिक नगरी का दर्जा दिया गया है।
​लोकतांत्रिक अधिकारों की मांग: याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि यह अधिसूचना शहर के निवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करती है। उन्होंने झारखंड सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि जमशेदपुर में अविलंब एक पूर्ण ‘नगर निगम’ का गठन किया जाए।
​संवैधानिक प्रावधानों को चुनौती: इस मामले में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243क्यू (1), झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2011 की धारा 481, और धारा 483 की वैधता को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। इसी कानूनी ढांचे के तहत जमशेदपुर को औद्योगिक टाउनशिप के रूप में बरकरार रखा गया है।

राजनीतिक गलियारों में हलचल
​यह मुद्दा पिछले लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं के केंद्र में बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई पर स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ तमाम जनप्रतिनिधियों की भी गहरी निगाहें टिकी हुई हैं। न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन तारीख टलने के कारण अब सभी पक्षों को अगली सुनवाई का इंतज़ार करना होगा।

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