बोधगया। बोधगया की पावन धरती एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बौद्ध परंपरा और आध्यात्मिक आस्था की साक्षी बनी। मौका था महाबोधि महाविहार में आयोजित महाकठिन चीवर दान समारोह का।
तीन महीने के वर्षावास के समापन के बाद आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में देशी-विदेशी बौद्ध श्रद्धालु और विभिन्न देशों से आए बौद्ध भिक्षु शामिल हुए।
बोधिवृक्ष के नीचे विशेष पूजा और प्रार्थना
इस दौरान महाबोधि मंदिर परिसर स्थित पवित्र बोधिवृक्ष के नीचे विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थना का आयोजन किया गया। बौद्ध श्रद्धालुओं ने भगवान बुद्ध के उपदेशों को याद करते हुए शांति, करुणा और विश्व कल्याण का संदेश दिया।
400 लामाओं को किया गया चीवर और वस्त्र दान
समारोह के दौरान करीब 400 लामाओं को वस्त्र और चीवर दान किया गया। थाईलैंड, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और वियतनाम सहित विभिन्न देशों से आए बौद्ध अनुयायियों की मौजूदगी ने इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया।
वर्षावास के समापन पर निभाई गई सदियों पुरानी परंपरा
गौरतलब है कि बौद्ध धर्म में कठिन चीवर दान का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। वर्षावास के तीन महीने पूरे होने के बाद बौद्ध भिक्षुओं को चीवर यानी वस्त्र दान करने की यह सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है। इसे दान, त्याग और सेवा की भावना से जोड़कर देखा जाता है।
बोधगया की अंतरराष्ट्रीय पहचान को मिला नया आयाम
महाबोधि मंदिर में आयोजित इस महाकठिन चीवर दान समारोह ने एक बार फिर बोधगया की अंतरराष्ट्रीय धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को मजबूत किया। विभिन्न देशों से आए श्रद्धालुओं की भागीदारी ने इस आयोजन को आस्था, परंपरा और वैश्विक बौद्ध एकजुटता का प्रतीक बनाया।

