धनबाद: गोड्डा–रांची एक्सप्रेस में खुद को रेलवे का विजिलेंस इंस्पेक्टर बताकर सफर कर रहे एक युवक की पोल धनबाद के टीटीआई की सतर्कता से खुल गई। मामला 13 मई 2026 का है, जब गाड़ी संख्या 18604 गोड्डा–रांची एक्सप्रेस में ड्यूटी पर तैनात टीटीआई जॉर्ज बारला टिकट जांच कर रहे थे।
जांच के दौरान बी-1 कोच की बर्थ संख्या 05 पर बैठे एक यात्री से टिकट मांगा गया। पूछताछ में उसने अपना नाम “नाग मणि शर्मा” बताते हुए खुद को पूर्व मध्य रेल मुख्यालय हाजीपुर का सतर्कता निरीक्षक (विजिलेंस इंस्पेक्टर) बताया। लेकिन बातचीत के दौरान उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगीं, जिसके बाद टीटीआई जॉर्ज बारला ने अपने सहकर्मियों से जानकारी जुटाई। जांच में पता चला कि हाजीपुर मुख्यालय में इस नाम का कोई विजिलेंस इंस्पेक्टर कार्यरत ही नहीं है।
संदेह गहराने पर टीटीआई ने यात्री से पहचान पत्र दिखाने को कहा, लेकिन वह लगातार आनाकानी करता रहा। जब उसे पुलिस को सौंपने की चेतावनी दी गई, तब उसने अपना पहचान पत्र और आधार कार्ड दिखाया। जांच में पहचान पत्र पर उसका नाम “नागमणि कुमार” पाया गया, जो पहले बताए गए नाम से अलग था।
मामला सामने आने के बाद युवक को नियमों के तहत वैध टिकट बनवाने का निर्देश दिया गया। पहले उसने कोच छोड़ने की बात कही, लेकिन रेलवे नियमों के अनुसार उससे ₹1336 का ईएफटी शुल्क वसूला गया और बाद में बी-1 कोच की खाली बर्थ संख्या 19 आवंटित की गई।
टीटीआई जॉर्ज बारला की सतर्कता और सूझबूझ से न केवल एक संदिग्ध यात्री की पहचान उजागर हुई, बल्कि रेलवे की सुरक्षा और पारदर्शिता व्यवस्था भी मजबूत होती नजर आई। रेलवे अधिकारियों ने उनकी कर्तव्यनिष्ठा और सजगता की सराहना की है।

