बिहार के नए ‘चौधरी’ के सामने होंगा ये चुनौतियां, नीतीश की खींची लकीर पार करना ना बन जाए ‘सिरदर्द’

Neelam
By Neelam
4 Min Read

सम्राट चौधरी के हाथों में अब बिहार की कमान है। नीतीश कुमार के बाद पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा। सुशासन बाबू की छवि से विदा हुए नीतीश के बाद अब सम्राट युग की शुरुआत होने जा रही है। ऐसे सत्ता संभालते ही सम्राट चौधरी के सामने कई चुनौतियां सामने आने वाली हैं।

बीजेपी ने दिया क्या मान रख पाएंगे सम्राट?

सम्राट ने अपने आक्रामक तेवरों एवं कार्यशैली से पार्टी में अपनी जगह और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी लोकप्रियता कायम की। डिप्टी सीएम के रूप काम करते हुए उन्होंने नीतीश कुमार का विश्वास जीता। समझा जाता है कि सीएम पद के लिए उनके चुनाव में नीतीश की उनके नाम पर रजामंदी भी काम की। यही नहीं अपनी कार्यशैली एवं चुनावी रणनीति की बदौलत वह केंद्रीय नेतृत्व की पसंद भी बने। यही वजह है कि बीजेपी ने सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाकर बड़ा इनाम दिया है।

नीतीश कुमार से अलग और बेहतर काम करना सबसे बड़ी चुनौती

बीजेपी ने तो सम्राट चौधरी को इनाम के तौर पर बिहार की कमान सौंप दी है। नीतीश कुमार से अलग और बेहतर काम करके की सबसे बड़ी चुनौती सामने खड़ी है। बिहार में नीतीश कुमार ने 24 नवंबर 2005 को सत्ता संभालने के बाद जो लकीर खींची, वो इतनी बड़ी है जिसका कोई ओर-छोर नहीं है। नीतीश कुमार के विरोधी भी इस बात को मानते हैं। वहीं नीतीश कुमार ने अपने ऊपर पूरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार का एक दाग तक नहीं लगने दिया। सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है।

भ्रष्टाचार और अफसरशाही कैसे करेंगे दूर?

बिहार में नौकरशाही और भ्रष्टाचार भी बड़ी चुनौती है। बिहार में भ्रष्टाचार और अफसरशाही इतनी मजबूती से जड़ बन चुकी है, कि पूरा राज्य रेड टेप की गिरफ्त में हैं। इस वजह से राज्य में केंद्र से जारी योजनाओं का सीधा लाभ भी लोगों तक नहीं पहुंच रहा है।

बेरोजगारी और पलायन पर कैसे करेंगे काम?

बेरोजगारी और पलायन राज्य का एक मुख्य मुद्दा रहा है। इस बार के चुनाव में भी इसी मुद्दे ने सियासी जोर पकड़ा था। इसके अलावा पेपर लीक से लेकर महिला सुरक्षा भी राज्य में मुख्य रूप से एक मुद्दा है। पलायन करती युवा पीढ़ी को भी साधने के लिए एनडीए के नए मुख्यमंत्री होने जा रहे सम्राट चौधरी के सामने चुनौती है।

कानून-व्यवस्था और जातीय हिंसा

बिहार में जातीय हिंसा, भू-माफिया और छोटे अपराध अभी भी चुनौती बने हुए हैं। गृह मंत्री रहते सम्राट चौधरी ने कुछ सुधार किए, लेकिन ग्रामीण इलाकों में जातीय दंगे और महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार आती रहती हैं। नई सरकार को पुलिस सुधार, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त एक्शन से भरोसा जगाना होगा। यदि शुरुआती दिनों में कोई बड़ी घटना हुई तो विपक्ष इसे “भाजपा सरकार की नाकामी” के रूप में प्रचारित करेगा

शराबबंदी पर क्या होगा सम्राट का फैसला

नीतीश कुमार के पद से हटने के बाद शराबबंदी की चर्चा भी जोरों पर है। शराबबंदी का फैसला करने के बाद नीतीश कुमार ने देश की राजनीति को एक बड़ा संदेश दिया था। लेकिन नीतीश कुनार के सत्ता से हटने के बाद अब ऐसा माना जा रहा है कि सम्राट मुख्यमंत्री बनने के बाद इस फैसले पर पुन: विचार कर सकते हैं। एनडीए में भी इसकी मांग होती रही है। राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने में यह एक महत्वपूर्ण फैसला हो सकता है। इसे हटाना सम्राट के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

Share This Article