डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: देश की पर्यावरण नीति में एक ऐतिहासिक अध्याय झारखंड की धरती से जुड़ने जा रहा है। जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित मोतीलाल नेहरू पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित पर्वत-नदी सम्मेलन में देश के पहले पर्वत-नदी बचाओ कानून का खाका तैयार कर लिया गया है। इस सम्मेलन में पर्यावरणविदों से लेकर न्यायपालिका के दिग्गजों ने मौजूदा व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए।
झारखंड तो भगवान का लाडला बेटा, बस इच्छाशक्ति की कमी
सम्मेलन को संबोधित करते हुए जलपुरुष के नाम से विख्यात मैगसेसे पुरस्कार विजेता राजेंद्र सिंह ने झारखंड की प्राकृतिक संपदा की तारीफ करते हुए भावुक बात कही। उन्होंने कहा जब राजस्थान जैसी मरुभूमि में जनसहयोग से नदियों को पुनर्जीवित किया जा सकता है, तो झारखंड तो भगवान का लाडला बेटा है। यहां झाड़ियां हैं, पहाड़ हैं और नदियों का जाल है। स्वर्णरेखा, खरकाई और दामोदर जैसी नदियों को फिर से पानीदार (समृद्ध) बनाना मुश्किल नहीं है, बशर्ते सरकार में इच्छाशक्ति हो। जलपुरुष ने पर्यावरण के प्रति लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को बस एक लाइन का कड़ा नियम बनाना चाहिए कि नदियों में गंदा पानी फेंकने वालों को मौत की सजा मिले। जब तक ऐसा कड़ा कानून नहीं बनेगा, तब तक जल प्रदूषण कम नहीं होगा और न ही जैव विविधता सुरक्षित रहेगी।
भारतीय पर्वत संरक्षण व संवर्धन विधेयक-2026 तैयार
राजेंद्र सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि देश में पहाड़ों और नदियों को बचाने के लिए अब तक कोई सीधा और स्वतंत्र कानून नहीं है, इसे अलग-अलग विभागों के साथ उलझाकर रख दिया गया है। इसी कमी को दूर करने के लिए जमशेदपुर के सम्मेलन में ‘भारतीय पर्वत संरक्षण एवं संवर्धन विधेयक-2026’ का प्रारूप तैयार किया गया। इस नए विधेयक में कुल 14 मुख्य बिंदु शामिल किए गए हैं। सम्मेलन में मौजूद पर्यावरण प्रेमियों और छात्रों की सहमति के बाद इस ड्राफ्ट को भारत के राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। राष्ट्रपति के बाद यह विधेयक अंतिम मुहर के लिए संसदीय समिति के पास जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस का बड़ा बयान: ‘युवाओं के आंदोलन को कॉकरोच कहना गलत’
इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा ने पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की भूमिका और देश के मौजूदा हालातों पर बेबाकी से अपनी राय रखी। जस्टिस गौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों पर आत्मनिरीक्षण की बात करते हुए कहा कि अदालत के कई फैसले बहुत शानदार रहे हैं, जिनकी वजह से राजस्थान की नदियों में आज पानी बह रहा है। हालांकि उन्होंने अरावली पर्वत मामले में 100 मीटर के पत्थर हटाने जैसे फैसलों को अटपटा भी करार दिया। देश के युवाओं और रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए जस्टिस गौड़ा ने शीर्ष अदालत की एक टिप्पणी पर गहरी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि आज देश में युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है। सरकारी और निजी नौकरियां अब एक जैसी हो चुकी हैं। ऐसे माहौल में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा युवाओं और जनता के आंदोलन को ‘कॉकरोच’ कहना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है।’
सम्मेलन में जुटे कई दिग्गज
इस ऐतिहासिक सम्मेलन में जमशेदपुर के स्थानीय विधायक सरयू राय के अलावा बिहार, ओडिशा और बंगाल की नदियों पर दशकों तक शोध करने वाले प्रख्यात नदी विशेषज्ञ दिनेश मिश्र ने भी अपने विचार साझा किए। सभी वक्ताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए जल, जंगल और जमीन का कानूनी संरक्षण अब समय की सबसे बड़ी मांग है।

