डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: पूर्वी सिंहभूम के युवाओं को हुनरमंद बनाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जिले के मनापीटा में जल्द ही एक अत्याधुनिक ड्राइविंग ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर की स्थापना होने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने 22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। भवन निर्माण विभाग ने इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया है, जिससे अब इस प्रोजेक्ट के काम में तेजी आने की उम्मीद है।
युवाओं के लिए क्यों खास है यह प्रोजेक्ट?
इस संस्थान के खुलने से न सिर्फ कोल्हान बल्कि पूरे झारखंड के युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ड्राइविंग ट्रेनिंग मिल सकेगी।
कमर्शियल ड्राइविंग में करियर: भारी वाहनों और कमर्शियल गाड़ियों को चलाने के लिए युवाओं को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे देश-विदेश में लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में नौकरियों के अपार अवसर खुलेंगे।
सड़क सुरक्षा में सुधार: पेशेवर तरीके से प्रशिक्षित ड्राइवरों के तैयार होने से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और सुरक्षित ड्राइविंग संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।
टेंडर प्रक्रिया शुरू, 7 जुलाई तक जमा होंगे आवेदन
भवन निर्माण विभाग ने इस प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए अपनी कमर कस ली है।
टेंडर डालने की अंतिम तिथि: 7 जुलाई
टेंडर खुलने की तिथि: 8 जुलाई
सरकार की कोशिश है कि टेंडर की प्रक्रिया पूरी होते ही निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया जाए।
11.88 एकड़ में फैलेगा कैंपस, आधुनिक सुविधाओं से होगा लैस
मनापीटा में बनने वाला यह संस्थान बेहद भव्य और अत्याधुनिक होगा। इसके लिए सरकार ने 11.88 एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित की है।
क्या-क्या होगा खास: इस ड्राइविंग इंस्टीट्यूट में प्रशासनिक भवन, आधुनिक वर्कशॉप, ट्रेनिंग ट्रैक, हॉस्टल ब्लॉक और स्टाफ क्वार्टर का निर्माण किया जाएगा।
लागत का ब्यौरा: कुल ₹22 करोड़ के बजट में से मुख्य प्रशासनिक भवन और वर्कशॉप के लिए ₹17 करोड़ से अधिक, जबकि शानदार ट्रेनिंग ट्रैक के निर्माण पर ₹3.21 करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा कैंपस की बाउंड्री वॉल और आंतरिक बुनियादी ढांचे पर भी करोड़ों रुपये खर्च होंगे।
अधिकारियों का क्या कहना है?
भवन निर्माण विभाग जमशेदपुर कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार का कहना है कि इस संस्थान के शुरू होने से न केवल युवाओं को उच्च स्तरीय ड्राइविंग प्रशिक्षण मिलेगा, बल्कि वे आत्मनिर्भर भी बन सकेंगे। टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य धरातल पर दिखाई देगा।

