डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर : एक तरफ नदी की खामोश गहराई में जिंदगी की तलाश जारी है, तो दूसरी तरफ सड़कों पर न्याय और सुरक्षा की मांग को लेकर छात्रों का गुस्सा उबल रहा है। आरआईटी थाना क्षेत्र के आसंगी नदी घाट पर रविवार को हुए एक दर्दनाक हादसे ने पूरे एनआईटी जमशेदपुर कैंपस को झकझोर कर रख दिया है। बीटेक अंतिम वर्ष का छात्र मीर तनवीर हसन, जो अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुन रहा था, रविवार को नदी की धारा में बह गया। लेकिन इस हादसे ने केवल एक परिवार की खुशियां नहीं छीनीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और एनआईटी प्रबंधन के सुरक्षा दावों की भी पोल खोलकर रख दी है।
रविवार को पश्चिम बंगाल के बर्धमान का रहने वाला मीर तनवीर हसन अपने दो सहपाठियों के साथ आसंगी नदी घाट पर गया था। किसी को अंदाजा नहीं था कि एक सामान्य सी डुबकी जिंदगी की आखिरी साबित होगी। पानी के तेज बहाव और गहराई का अंदाजा न होने के कारण तनवीर अचानक डूबने लगा। दोस्तों ने जान हथेली पर रखकर उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन देखते ही देखते तनवीर पानी के आगोश में समा गया।

व्यवस्था पर सवाल: जब ‘रेस्क्यू’ के नाम पर पहुंची महज औपचारिकता
घटना के बाद जो नजारा देखने को मिला, उसने छात्रों के आक्रोश को आग दे दी। साथी को खोने के गम में डूबे एनआईटी के छात्र जब मौके पर पहुंचे, तो प्रशासन की लेट-लतीफी ने उनके सब्र का बांध तोड़ दिया। छात्रों का आरोप है कि आपातकालीन सूचना के बावजूद प्रशासनिक अमले को मौके पर पहुंचने में दो लंबे घंटे लग गए। जब टीम पहुंची, तो उनके पास बचाव कार्य के लिए एक मामूली रस्सी तक उपलब्ध नहीं थी। छात्रों का साफ कहना है कि अगर वक्त रहते और सही संसाधनों के साथ रेस्क्यू शुरू होता, तो शायद उनके साथी की सांसें बचाई जा सकती थी।
खूनी बनता आसंगी घाट: 6 महीने, 4 जानें और ‘सिफर’ इंतज़ाम
यह कोई पहला हादसा नहीं है। आसंगी नदी का यह घाट अब हादसों का नया ठिकाना बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पिछले छह महीनों में यहां यह चौथी घटना है, जहां चार और चिराग बुझ चुके हैं। इसके बावजूद न तो घाट पर कोई खतरा बताने वाला बोर्ड लगा, न ही कोई सुरक्षा घेरा बनाया गया।
गुस्से में उबले छात्र, उठाईं ये सख्त मांगे
प्रशासनिक लापरवाही से नाराज छात्रों ने सड़क पर बैठकर यातायात ठप कर दिया और एनआईटी प्रशासन से आर-पार के मूड में आ गए। छात्रों ने मांग की है कि एनआईटी परिसर के चारों तरफ पक्की घेराबंदी की जाए, ताकि छात्र इन खतरनाक और अनधिकृत रास्तों का इस्तेमाल ही न कर सकें। नदी के तमाम खतरनाक हिस्सों को तुरंत सील कर चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। घाटों पर 24 घंटे ट्रेंड लाइफगार्ड और गोताखोरों की तैनाती की जाए। फिलहाल, पुलिस और राहत दल नदी के कोने-कोने में तनवीर की तलाश कर रहे हैं, लेकिन छात्रों का विरोध प्रदर्शन व्यवस्था की उस नींद को जगाने की कोशिश कर रहा है जो हादसों के बाद ही खुलती है।

