देवघर में बालू माफियाओं के आगे बेबस व्यवस्था! आखिर किसके संरक्षण में धड़ल्ले से चल रहा है अवैध खनन और परिवहन का खेल

KK Sagar
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देवघर: झारखंड सरकार और प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन देवघर में हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। चितोलोरिया से देवसंग कॉलेज होते हुए देवसंग चौक तक बालू लदे ट्रैक्टरों और डंपरों की लगातार आवाजाही से अवैध बालू कारोबार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बालू के अवैध खनन और परिवहन का खेल लंबे समय से जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में विफल साबित हो रहे हैं।

सुबह और शाम के समय इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही से आम लोगों, छात्रों और मॉर्निंग वॉक करने वालों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। देवसंग कॉलेज रोड जैसे व्यस्त मार्ग पर तेज रफ्तार बालू लदे वाहनों के गुजरने से दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।

सवाल यह है कि आखिर इन वाहनों के पास वैध ई-चालान और परिवहन की अनुमति है या नहीं? यदि सभी दस्तावेज वैध हैं तो उनकी नियमित जांच क्यों नहीं हो रही, और यदि नहीं हैं तो इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? पुलिस गश्ती और प्रशासनिक निगरानी के बावजूद भारी मात्रा में बालू का परिवहन होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

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अवैध बालू खनन से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो रहा है। साथ ही भारी वाहनों के कारण सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो रही हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका पालन होता नहीं दिख रहा है।

जरूरत है कि जिला प्रशासन, खनन विभाग तथा पुलिस प्रशासन इस मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इसकी जांच करे और अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना सुनिश्चित करें।

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