NGOs के लिए नए नियम लागू, विदेशी फंड के दुरुपयोग पर भारी जुर्माना

KK Sagar
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केंद्र सरकार ने विदेशी चंदा (Foreign Contribution) प्राप्त करने और उसके उपयोग को लेकर नियमों को और सख्त कर दिया है। गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA), 2010 के तहत विभिन्न उल्लंघनों पर लगने वाले जुर्माने में संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। नए नियमों के तहत विदेशी फंड के दुरुपयोग, निर्धारित सीमा से अधिक प्रशासनिक खर्च और नियमों के विपरीत उपयोग पर अब भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।

मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, यदि कोई संस्था विदेशी चंदे का 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रशासनिक खर्चों पर खर्च करती है, तो उसे एक लाख रुपये या अतिरिक्त खर्च की गई राशि का 5 प्रतिशत, जो भी अधिक हो, जुर्माने के रूप में देना होगा।

इसके अलावा यदि विदेशी फंड को सट्टेबाजी, जोखिमपूर्ण या प्रतिबंधित गतिविधियों में लगाया जाता है, तो संस्था पर एक लाख रुपये या संबंधित राशि का 30 प्रतिशत जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही ऐसी गतिविधियों से हुई पूरी कमाई भी सरकार द्वारा जब्त की जा सकेगी।

उद्देश्य बदलने पर भी कार्रवाई

यदि किसी संस्था को किसी विशेष उद्देश्य के लिए विदेशी फंड मिला है और उसका उपयोग किसी अन्य कार्य में किया जाता है, तो उस पर भी 30 प्रतिशत या न्यूनतम एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसी प्रकार बिना अनुमति, बिना पंजीकरण या निर्धारित क्षेत्र से बाहर विदेशी फंड के उपयोग पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

NGOs को बताना होगा काम का उद्देश्य

सरकार ने FCRA नियम, 2011 में संशोधन करते हुए यह भी अनिवार्य कर दिया है कि विदेशी फंड प्राप्त करने के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं को अपने कार्यों का उद्देश्य और संचालन क्षेत्र स्पष्ट रूप से बताना होगा। संस्थाओं को आवेदन के दौरान सरकार द्वारा निर्धारित सूची में से ही अपने कार्यक्षेत्र और उद्देश्य का चयन करना होगा।

इन उद्देश्यों में धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सामाजिक गतिविधियां शामिल हैं। हालांकि धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) से जुड़ी गतिविधियों को पंजीकरण के लिए पात्र श्रेणी से बाहर रखा गया है।

विदेशी नागरिक पदाधिकारियों पर भी नियम सख्त

नए नियमों के अनुसार, जिन संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारियों में विदेशी नागरिक शामिल होंगे, उन्हें FCRA के तहत पंजीकरण या पूर्व अनुमति देने पर सामान्यतः विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार विशेष परिस्थितियों में आदेश जारी कर ऐसे मामलों में छूट दे सकती है।

मुख्य पदाधिकारी की परिभाषा का विस्तार

सरकार ने “मुख्य पदाधिकारी” (Key Functionary) की परिभाषा को भी व्यापक बना दिया है। अब इसमें कंपनी के निदेशक, फर्म के साझेदार, ट्रस्टी, हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के कर्ता और संस्था के प्रबंधन या संचालन पर नियंत्रण रखने वाले अन्य व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है।

जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में कदम

गृह मंत्रालय का मानना है कि इन संशोधनों से विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी चंदे का उपयोग केवल स्वीकृत और वैध उद्देश्यों के लिए ही किया जाए तथा किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर प्रभावी कार्रवाई हो सके।

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