तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया अध्याय शुरू हो गया है। तमिलगा वेत्री कन्नगम (टीवीके) प्रमुख विजय के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया है। विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है।विजय के साथ 9 अन्य नेता भी मंत्रीपद की शपथ ले रहे हैं।
108 सीटें जीतकर टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी
पहली बार चुनावी मैदान में उतरे विजय ने सिर्फ 2 साल पहले राजनीतिक पार्टी टीवीके बनाई थी। इस चुनाव में उन्हें जनता का भरपूर प्यार मिला। विजय की पार्टी ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सभी को चौंका दिया था। हालांकि पार्टी बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गई थी, लेकिन कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और अन्य सहयोगी दलों के समर्थन से विजय ने सरकार बना ली।
इन नेताओं ने मंत्री पद की शपथ ली
विजय के सीएम पद की शपथ के अलावा केजी अरुणराज, एन आनंद, आधव अर्जुन, केए सेंगोट्टैयन, पी. वेंकटरमणन, आर निर्मल कुमार, राजमोहन, टीके प्रभु, एस कीर्तना ने मंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने उन्हें पद की शपथ दिलाई।
देश के कई बड़े नेता समारोह में हुए शामिल
इस शपथ ग्रहण समारोह में देश के कई बड़े नेता भी शामिल हुए हैं। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, तेलंगाना की पूर्व राज्यपाल और बीजेपी नेता तमिलिसाई सुंदरराजन, बीजेपी नेता के अन्नामलाई और तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन भी कार्यक्रम में पहुंचे। इसके अलावा फिल्म और राजनीति जगत की कई हस्तियां भी समारोह का हिस्सा बनी हैं। विजय के माता-पिता भी इस खास मौके पर मौजूद रहे। वहीं अभिनेत्री त्रृषा कृष्णन की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
1967 से दो द्रविड़ दल का रहा प्रभाव
1967 के बाद यह पहला मौका है जब द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कज़गम (एआईएडीएमके) से बाहर का कोई नेता राज्य की सत्ता तक पहुंचा है। तमिलनाडु में 1967 से ही सी. अन्नादुरई के नेतृत्व में द्रविड़ विचारधारा वाली पार्टी- द्रविड़ मुनेत्र कझगम (द्रमुक) सत्ता में आई। बाद में द्रमुक से अलग हुई अन्नाद्रमुक ने उसे चुनौती दी। दोनों द्रविड़ दल ही पिछले 49 साल से यहां की सत्ता में काबिज हैं। कभी तमिलनाडु की सत्ता में द्रमुक तो कभी अन्नाद्रमुक काबिज रही और दो राष्ट्रीय दल- कांग्रेस और भाजपा हमेशा ही इन दोनों दलों की गठबंधन की साथी के तौर पर जुड़ी रहीं, लेकिन अपने दम पर सत्ता हासिल करने में नाकाम रहीं। अब विजय जोसेफ और उनकी टीवीके ने द्रविड़ पार्टियों के इस वर्चस्व को तोड़ने का काम किया है और तमिल राजनीति में अलग पहचान बनाई है।

