डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के मशहूर दलमा वन्यजीव अभ्यारण्य और आसपास के इलाकों में एक बार फिर नक्सलियों की हलचल बढ़ने की खबर से हड़कंप मच गया है। खुफिया इनपुट मिलने के बाद वन विभाग और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हो गई हैं। सुरक्षा के लिहाज से वन अधिकारियों और कर्मचारियों की आवाजाही को भी सीमित कर दिया गया है।
जंगलों में लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग तेज, खुफिया तंत्र सक्रिय
नक्सली मूवमेंट की जानकारी मिलते ही सुरक्षा बलों ने दलमा के जंगलों में लॉन्ग रेंज पेट्रोलिंग तेज कर दी है। दलमा के शीर्ष क्षेत्र में बने शिविरों में सीआरपीएफ और सैफ (झारखंड जगुआर) के जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसके साथ ही पुलिस ने स्थानीय ग्रामीणों और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा सके।
झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा पर कड़ी घेराबंदी
नक्सलियों के सीमा पार मूवमेंट को रोकने के लिए झारखंड और पश्चिम बंगाल की सीमा पर निगरानी बेहद कड़ी कर दी गई है। सीमावर्ती जंगलों और संवेदनशील रास्तों पर पुलिस बल को हाई अलर्ट पर रखा गया है और हर आने-जाने वाले की सघन चेकिंग की जा रही है। करीब छह माह पहले वन विभाग की एक विशेषज्ञ टीम (जो ऑर्किड प्रजातियों के अध्ययन के लिए आई थी) ने वॉकी-टॉकी पर 5-6 संदिग्ध लोगों को बात करते सुना था, जिसके बाद से ही सतर्कता बढ़ाई गई थी।
दलमा के चिमटी वन क्षेत्र के अंतर्गत बांदरजोलोकोचा जंगल में दो ट्रैप कैमरे और उनके पिक्स चोरी होने के मामले की भी पुलिस और वन विभाग की टीम बारीकी से जांच कर रही है।
वन कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि: डीएफओ
इस पूरे मामले पर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नक्सल गतिविधियों को लेकर कुछ बातें सामने आई हैं, जिन्हें खारिज नहीं किया जा सकता। वन विभाग के कर्मचारी अपनी ड्यूटी मुस्तैदी से कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा कारणों से उनके मूवमेंट को थोड़ा सीमित और सतर्क किया गया है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

