बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और महागठबंधन ने अभी तक अपने उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है। इस बीच जन सुराज पार्टी ने अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। जन सुराज ने प्रशांत कुमार को बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है।
बीजेपी को उसके गढ़ में पीके देंगे टक्कर
पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट बीजेपी के लिए गढ़ कही जाती है। यहां पिछले कई दशक से बीजेपी लगातार जीतती रही है। नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद बांकीपुर में उपचुनाव होना है। इस हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए जन सुराज पार्टी ने अपने सबसे बड़े चेहरे प्रशांत किशोर को चुनावी मैदान में उतार दिया है। जन सुराज के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस बात की आधिकारिक घोषणा की। तब प्रशांत किशोर भी उनके बगल में ही बैठे हुए थे
मैं 242 विधायकों पर भारी पड़ूंगा- प्रशांत कुमार
उम्मीदवार घोषित होने के बाद पत्रकारों से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा, “मेरे चुनाव जीतने से सरकार की सेहत पर बहुत बड़ा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन इतना तय है कि अगर आप मुझे चुनकर विधानसभा भेजेंगे, तो मैं 242 विधायकों पर भारी पड़ूंगा और लोगों की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठाकर उनका प्रतिनिधित्व करूंगा।”
सीएम सम्राट चौधरी पर साधा निशाना
इस दौरान प्रशांत किशोर ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी हमला बोला उन्होंने कहा कि वह पिछले दरवाजे से मुख्यमंत्री बने हैं। वह एक सिलेक्टेड मुख्यमंत्री है। उनका भी चाल चरित्र और चेहरा जल्द ही सामने आ जाएगा।
सरकार नहीं बदलेगी राजनीति बदलेगी-पीके
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनकी जीत या हार से सरकार नहीं बदलेगी, लेकिन इतना तय है कि इससे प्रदेश की राजनीति की दिशा जरूर प्रभावित होगी। उन्होंने कहा, “मेरी जीत या हार यह भी तय करेगी कि लोग सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज से सहमत हैं या असहमत।”
बांकीपुर में मुकाबला होगा बेहद दिलचस्प
बांकीपुर को बीजेपी का गढ़ माना जाता है। 1995 से बांकीपुर की सीट (2008 तक पटना पश्चिम) पर बीजेपी का कब्जा रहा है। 2025 के चुनाव में बीजेपी के नितिन नवीन को इस सीट पर 62.66 प्रतिशत वोट मिले थे। ऐसे में प्रशांत किशोर के खुद बांकीपुर से चुनाव लड़ने के फैसले ने बिहार की राजनीति को एक नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अब तक पर्दे के पीछे रहकर रणनीतियां बनाने वाले पीके का सीधे चुनावी मैदान में उतरना बीजेपी के इस मजबूत गढ़ में कांटे की टक्कर पैदा करेगा। 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग पर अब पूरे देश की नजरें टिकी रहेंगी।

