प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बातचीत करेंगे। पीएम मोदी पश्चिम एशिया में युद्ध से बने हालात के बीच राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बातचीत करेंगे। बैठक में राज्यों की तैयारी और योजनाओं पर चर्चा होगी। खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष शुरू होने के बाद पीएम मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ पहली बार बैठक होगी। इस बातचीत में उन 5 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल नहीं होंगे, जहां विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया के हालातों से निपटने की तैयारी
ईरान जंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। भारत में भी पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर दिख रहा है। ऐसे में पश्चिम एशिया के हालातों से कैसे निपटा जाए, इसके लिए मोदी सरका ने तैयारी शुरू कर दी है। ईरान-अमेरिका जंग से निपटने की तैयारी के मद्देनजर पीएम मोदी राज्यों के मुख्यमंत्री से बात करेंगे। इस पहल का उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना से प्रेरित होकर सरकार के प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना है।
शाम 6 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये बातचीत
बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री आज शाम 6 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मुख्यमंत्रियों के साथ पश्चिम एशिया संघर्ष पर बातचीत करेंगे, ताकि राज्यों की तैयारियों और योजनाओं की समीक्षा की जा सके। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘टीम इंडिया’ की भावना के साथ प्रयासों में तालमेल सुनिश्चित करना होगा।
पीएम मोदी संसद में दे चुके हैं बयान
इससे पहले संसद में दिए गए बयान में पीएम ने कहा था कि पश्चिम एशिया में युद्ध से बने हालात में कोविड के दौर की याद दिलाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि इस युद्ध के कारण दुनिया में जो कठिन हालात बने हैं, उनका प्रभाव लंबे समय तक बने रहने की आशंका है। उन्होंने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा था कि कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था।
देश में 60 दिन का ईंधन- सरकार
वहीं, सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद कोई तात्कालिक खतरा नहीं है। सरकार ने बताया कि देश के पास 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। लोगों से ईंधन की कमी से जुड़ी अटकलों पर ध्यान न देने की अपील की गई। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और अच्छी तरह प्रबंधित है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, कच्चे तेल की आपूर्ति अगले लगभग दो महीने के लिए पहले ही सुनिश्चित कर ली गई है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल बाजार कंपनियों ने पहले से ही आयात की व्यवस्था कर ली है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहे। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाओं के बावजूद भारत 40 से अधिक देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो जाती है।

