जमशेदपुर / टाटानगर: ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा और सेवा के लिए तैनात रेलकर्मी ही जब अवैध धंधों में लिप्त हो जाएं, तो सफर पर सवाल उठना लाजिमी है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला टाटा-कटिहार एक्सप्रेस में सामने आया है, जहां चलती ट्रेन में यात्रियों को सुविधाएं देने वाले कोच अटेंडेंट को आरपीएफ ने शराब की तस्करी करते हुए रंगे हाथों दबोचा है।
गुप्त सूचना पर आरपीएफ का ऑपरेशन क्लीन
टाटानगर आरपीएफ को लंबे समय से ट्रेन के भीतर अवैध गतिविधियों की भनक मिल रही थी। पुख्ता और गुप्त सूचना के आधार पर आरपीएफ टीम ने टाटा-कटिहार एक्सप्रेस के कोच नंबर एम-1 में अचानक छापेमारी की। इस दौरान टीम ने कोच अटेंडेंट राजेश कुमार शर्मा के पास से 6 बोतल शराब बरामद की।
बिहार शराबबंदी का फायदा: ऊंचे दामों पर ऑन-सीट डिलीवरी
पूछताछ में आरोपी अटेंडेंट ने जो खुलासे किए, वे सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय हैं।
मोडस ऑपरेंडी: आरोपी जमशेदपुर से ही शराब खरीदता था और टाटानगर स्टेशन से ड्यूटी पर चढ़ते समय इसे चालाकी से ट्रेन में छिपा देता था।
टारगेट कस्टमर: चूंकि बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है, इसलिए वह बिहार जाने वाले यात्रियों को निशाना बनाता था।
ब्लैक मार्केटिंग: चलती ट्रेन में होम डिलीवरी की तर्ज पर वह शराब के शौकीनों को ऊंचे और मनमाने दामों पर बोतलें परोसता था और मोटा मुनाफा कमाता था।
स्वीकारोक्ति और कार्रवाई
आरपीएफ की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी राजेश कुमार शर्मा ने कबूल किया कि वह काफी दिनों से इस अवैध धंधे को अंजाम दे रहा था। आरपीएफ ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और उसे जेल भेजने की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर रेलवे प्रबंधन और चेकिंग व्यवस्था की सतर्कता पर सवाल खड़े कर दिए हैं कि कैसे एक रेलकर्मी स्टेशन से लेकर ट्रेन के भीतर तक शराब का अवैध नेटवर्क चला रहा था।

