झाझा : भीषण गर्मी में 200 मीटर दूर से पानी लाने को मजबूर छात्र-शिक्षक, स्कूल में नहीं पेयजल की व्यवस्था; , DEO बोले- आवेदन मिलते ही होगी कार्रवाई

KK Sagar
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झाझा (जमुई): शिक्षा विभाग एक ओर सरकारी विद्यालयों में बेहतर आधारभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे करता है, वहीं दूसरी ओर झाझा प्रखंड के बाराकोला पंचायत स्थित नया प्राथमिक विद्यालय अमकोलिया की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आ रही है। यहां पढ़ने वाले करीब 50 बच्चे और शिक्षक आज भी पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

विद्यालय के प्रधान शिक्षक मो. इम्तियाज अंसार ने पहली बार 21 अप्रैल 2026 को प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को आवेदन देकर विद्यालय में पेयजल की व्यवस्था कराने की मांग की थी। लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उन्होंने 23 जून 2026 को पुनः आवेदन देकर समस्या के समाधान की गुहार लगाई है।

पत्र के अनुसार इस समस्या की जानकारी पहले भी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO), जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) को दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

प्रधान शिक्षक द्वारा दिए गए आवेदन के अनुसार विद्यालय में वर्षों से पेयजल की समस्या बनी हुई है। विद्यालय परिसर में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यालय से करीब 200 मीटर दूर एक सरकारी चापाकल है, जो जर्जर अवस्था में है और वही बच्चों के पीने के पानी तथा मिड डे मील (MDM) का एकमात्र सहारा है।

भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच बच्चे और शिक्षक 200 मीटर दूर से पानी लाकर पीने को मजबूर हैं। ऐसे में बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बनी रहती है। छोटे-छोटे बच्चों को बार-बार प्यास लगना स्वाभाविक है, लेकिन पानी के लिए उन्हें विद्यालय परिसर से बाहर जाना पड़ता है। इससे गर्मी और लू का खतरा बढ़ जाता है तथा किसी भी समय कोई अप्रिय घटना भी घट सकती है।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस समस्या की शिकायत शिक्षा विभाग के पदाधिकारियों से पहले भी की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। प्रधान शिक्षक ने कहा है कि बच्चे कई बार बेहोश होने की स्थिति में पहुंच जाते हैं और यदि समय रहते व्यवस्था नहीं की गई, तो बड़ी घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।

BDO बोले – इस मद में नहीं आता फंड

वहीं, जब इस संबंध में झाझा प्रखंड विकास पदाधिकारी से दूरभाष पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि विद्यालय विकास के नाम से अंचल कार्यालय में ऐसा कोई मद नहीं आता है। उन्होंने कहा कि इस मामले में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) से संपर्क किया जाना चाहिए।

DEO ने कहा – आवेदन मिलते ही होगी कार्रवाई

इधर, जब इस विषय में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) से दूरभाष के माध्यम से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि उनके पास अभी तक इस संबंध में कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। हालांकि उन्होंने आश्वस्त किया कि जैसे ही आवेदन प्राप्त होगा, मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को लिखित रूप से भेजा जाएगा और विद्यालय में पानी की व्यवस्था कराने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा विभाग के दावों पर उठ रहे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार और शिक्षा विभाग विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, डिजिटल शिक्षा और गुणवत्ता सुधार के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं, तब एक विद्यालय में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पाना आखिर किसकी जिम्मेदारी है?

यह स्थिति कहीं न कहीं शिक्षा विभाग और संबंधित पदाधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। विद्यालयों में बच्चों के लिए मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है।

प्रचंड गर्मी के इस दौर में पानी हर व्यक्ति की सबसे बुनियादी जरूरत है। बच्चों को बार-बार प्यास लगना स्वाभाविक है, लेकिन जब विद्यालय में ही पानी की व्यवस्था नहीं हो, तो शिक्षा व्यवस्था के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। आखिरकार, “जल ही जीवन है” और बच्चों के जीवन से जुड़ी इस मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी किसी भी हाल में उचित नहीं कही जा सकती।

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