बिहार की राजनीति में मुखर और बागी नेता के रूप में पहचान रखने वाली रितु जायसवाल ने भारतीय जनता पार्टी के साथ नई राजनीतिक पारी की शुरूआत की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) से निष्कासित रितु जायसवाल बीजेपी में शामिल हो गई हैं। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई।
पटना स्थित बीजेपी कार्यालय के अटल सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बिहार बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उन्हें पार्टी की सदस्यता दिलाई। इस मौके पर रितु जायसवाल ने कहा कि बीजेपी में शामिल होकर मैं गौरवान्वित महसूस कर रही हूं।
बीजेपी में आने का फैसला क्यों किया?
इस मौके पर मीडिया को संबोधित करते हुए रितु जायसवाल ने खुद ही बताया कि उन्होंने क्यों बीजेपी में आने का फैसला किया। उन्होंने इस संबंध में कहा, “सबसे बड़ी बात होती है राष्ट्रहित की… जो व्यक्ति, जो पार्टी राष्ट्र को पहले रखती हो, प्रधानमंत्री भी राष्ट्र की बात करते हैं, पहले होता था कि किसी को कैंसर हो जाए और उसके पास पैसे नहीं हैं तो वो उसी दिन से अपनी मृत्यु की तारीख गिनता था कि कब मर जाऊंगा…लेकिन जब से आयुष्मान कार्ड आया है इससे शक्ति मिली है। अगर किसी महिला का पति बीमार हो जाए तो महिला को लगता है कि मेरा पति बच सकता है क्योंकि प्रधानमंत्री ने हाथ में आयुष्मान कार्ड दिया है।”
रितु जयसवाल ने पुराने दिनों को किया याद
रितु जयसवाल ने अपने पुराने दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि जब राजद से टिकट कटने के बाद उन्होंने परिहार सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया, तो राजनीतिक गलियारों में उन्हें ‘बागी’ कहा गया। रितु के मुताबिक, असल में वो खुद बागी नहीं हुई थीं, बल्कि परिहार की जनता व्यवस्था के खिलाफ बागी हो चुकी थी क्योंकि वे क्षेत्र में सिर्फ रितु जयसवाल को ही जनप्रतिनिधि के रूप में देखना चाहते थे।
ट्रोलिंग को लेकर दिया बयान
पार्टी बदलने के बाद सोशल मीडिया पर होने वाले विरोध को लेकर रितु जायसवाल ने साफ कहा उनके पुराने बयानों और वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल कर उन्हें ट्रोल करने की कोशिश करेंगे। हालांकि, वे इन हरकतों से डरने वाली नहीं हैं और पूरी तरह निडर होकर नई पार्टी में काम करेंगी।
परिहार से टिकट कटा तो निर्दलीय लड़ीं चुनाव
रितु जायसवाल लंबे समय तक राजद का एक प्रमुख चेहरा रही हैं। मुखिया दीदी के नाम से रितु जानी जाती रही हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों से वे पार्टी नेतृत्व (खासकर तेजस्वी यादव) से नाराज चल रही थीं। नाराजगी की मुख्य वजह 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्हें परिहार सीट से टिकट न मिलना था। टिकट कटने से नाराज रितु ने पार्टी से बगावत करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ा था, हालांकि इस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस अनुशासनहीनता के बाद आरजेडी नेतृत्व ने उन्हें 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।

