सरायकेला: एम्बुलेंस के इंतजार में उखड़ती रहीं सांसें, वज्रपात के बाद तड़पते अपनों पर गोबर लेपते रहे ग्रामीण, बच्ची समेत 2 की मौत

Manju
By Manju
4 Min Read

डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर :झारखंड के सरायकेला थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मुड़कुम पंचायत के नुआगुड़ा गांव में रविवार शाम हुए वज्रपात ने दो परिवारों को ताउम्र का दर्द दे दिया। इस हादसे में 10 साल की मासूम बच्ची और एक युवक की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए। इस पूरी घटना ने एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है, वहीं आपदा के वक्त जागरूकता की कमी और अंधविश्वास की वो तस्वीर भी दिखाई, जहां लोग अपनों को बचाने के लिए डॉक्टरों के बजाय गोबर का सहारा लेने को मजबूर है।

ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार नुआगुड़ा गांव में मृतका रौशनी सुरेन की मां सरस्वती सुरेन का श्राद्ध कर्म चल रहा था। घर और आंगन में ग्रामीणों की भारी भीड़ जुटी थी। इसी बीच रविवार शाम करीब 4:30 बजे तेज बारिश के साथ आसमान से आफत बरसी। कड़कड़ाहट के साथ हुए भीषण वज्रपात की चपेट में आने से एक साथ 7 लोग अचेत होकर जमीन पर गिर पड़े। बिजली गिरते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

अंधविश्वास या मजबूरी? शरीर पर मला गोबर
​बिजली का कहर थमने के बाद जब ग्रामीण घायलों के पास पहुंचे, तो अस्पताल ले जाने के बजाय वे पारंपरिक ढर्रे और अंधविश्वास के फेर में पड़ गए। ग्रामीणों ने आनन-फानन में बेहोश पड़े सातों लोगों के पूरे शरीर पर गोबर लेपना शुरू कर दिया। ग्रामीणों का दावा है कि गोबर लगाने के दौरान 10 वर्षीय रौशनी और 32 वर्षीय सोनू सरदार की सांसें चल रही थीं। वे जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे थे, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
घायलों की सूची जिनका अस्पताल में चल रहा है इलाज
​मालती सुरेन (6 वर्ष)
​सोनामाई सुरेन (12 वर्ष)
​सुनील गागराई (18 वर्ष)
​बेबी सुरेन (40 वर्ष)
​राधी सुरेन (35 वर्ष)

डेढ़ घंटे लेट पहुंची एम्बुलेंस, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
​इस हादसे में सिस्टम की घोर लापरवाही भी सामने आई है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटना शाम 4:30 बजे की है और वे तुरंत एम्बुलेंस के लिए लगातार फोन करने लगे। लेकिन एम्बुलेंस को गांव पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का वक्त लग गया और वह शाम 6:00 बजे पहुंची। ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस मिल जाती और इलाज शुरू हो जाता, तो रौशनी और सोनू की जान बचाई जा सकती थी। दोनों ने अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही दम तोड़ा। सदर अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

पुलिस मामले की जांच में जुटी
​घटना की सूचना मिलते ही सरायकेला थाना प्रभारी विनय कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और मामले की जानकारी ली। फिलहाल सभी 5 घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है, जहां उनकी स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। इस हादसे के बाद से पूरे गांव में मातम और आक्रोश का माहौल है।

Share This Article