टाटा स्टील वेतन समझौता: MGB के आंकड़ों पर फंसा पेच, जानिए यूनियन और प्रबंधन की मीटिंग में क्या हुआ और आगे क्या होने की उम्मीद

Manju
By Manju
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डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : टाटा स्टील के कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित पड़े ग्रेड रिवीजन (वेतन समझौते) को लेकर सस्पेंस लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रबंधन और टाटा वर्कर्स यूनियन के बीच एक बार फिर लंबी बातचीत हुई, लेकिन न्यूनतम गारंटेड बेनिफिट के आंकड़ों को लेकर पेच अभी भी फंसा हुआ है।
​अब कर्मचारियों की उम्मीदें आगामी 7 जून पर टिक गई हैं, जब कंपनी की चीफ पीपुल ऑफिसर अत्रेयी सान्याल जमशेदपुर आएंगी। माना जा रहा है कि उनके आने के बाद होने वाली वार्ता में कोई ठोस नतीजा निकल सकता है।

प्रबंधन 8% पर अड़ा, यूनियन की मांग 13%
​सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दो अलग-अलग चरणों में हुई मैराथन बैठक में प्रबंधन ने साफ कर दिया है कि वह 8 प्रतिशत से अधिक एमजीबी देने के पक्ष में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, यूनियन नेतृत्व का रुख बेहद कड़ा है।

यूनियन का तर्क: यूनियन नेताओं का कहना है कि कर्मचारियों के अपर बेसिक पर डीए सीलिंग लग चुकी है, जिससे उन्हें पहले ही भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में बढ़ती महंगाई को देखते हुए एमजीबी को पिछले समझौते की तरह 12.75 प्रतिशत पर रखने या इसे बढ़ाकर 13 प्रतिशत करने की मांग जायज है। यूनियन ने साफ किया है कि महंगाई के इस दौर में वे इससे कम पर समझौता नहीं करेंगे।

क्या हैं मुख्य विवादित बिंदु?
एमजीबी पर गतिरोध: प्रबंधन जहां 8% पर सिमटा है, वहीं यूनियन 13% की मांग पर अडिग है।
छह प्रतिशत घटाने की मांग: बैठक में प्रबंधन की ओर से पुरानी परंपराओं के विपरीत कुछ शर्तों में छह प्रतिशत कटौती का प्रस्ताव भी दोहराया गया, जिसका यूनियन ने कड़ा विरोध किया।
सीएचआरओ पर नजरें: बैठक में सीएचआरओ जुबिन पालिया और राहुल दुबे भी उपस्थित थे, लेकिन अब अंतिम फैसला 7 जून को अत्रेयी सान्याल की मौजूदगी में होने की संभावना है।

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