शिक्षिका को नहीं मिला मातृत्व अवकाश, गर्भ में बच्चे की मौत का आरोप; पलामू में शिक्षा विभाग पर रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप

KK Sagar
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पलामू: झारखंड के पलामू जिले से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। आरोप है कि मातृत्व अवकाश नहीं मिलने और कथित रूप से रिश्वत की मांग के कारण एक गर्भवती सरकारी शिक्षिका को अंतिम समय तक ड्यूटी करनी पड़ी, जिसके बाद गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई। घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, तरहसी स्थित सिलदलिया प्लस-2 हाई स्कूल में कार्यरत शिक्षिका प्रतिनियुक्ति पर चैनपुर के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में तैनात थीं। परिजनों का आरोप है कि अंतिम महीने की गर्भावस्था के बावजूद उन्होंने कई बार मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन दिया, लेकिन उनकी छुट्टी स्वीकृत नहीं की गई।

परिजनों ने आरोप लगाया है कि जिला शिक्षा अधीक्षक (डीएसई) और शिक्षा विभाग के दो क्लर्क—ईश्वरी दयाल राम एवं अरुण कुमार गिरी—ने अवकाश स्वीकृत करने के बदले ₹50 हजार की रिश्वत मांगी। आरोप है कि रिश्वत नहीं देने पर अवकाश नहीं दिया गया। इसी दौरान स्कूल में शिक्षिका को प्रसव पीड़ा हुई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने गर्भ में ही बच्चे की मौत होने की पुष्टि की।

बताया जा रहा है कि पलामू के उपायुक्त ने भी जिला शिक्षा अधीक्षक को आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद समय पर मातृत्व अवकाश स्वीकृत नहीं हो सका। घटना के बाद परिजनों ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर सरकार और शिक्षा विभाग को घेरते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश महिला कर्मचारी का कानूनी अधिकार है। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

फिलहाल इस मामले की जांच की मांग तेज हो गई है। हालांकि रिश्वतखोरी और लापरवाही के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना के लिए कौन जिम्मेदार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला केवल भ्रष्टाचार ही नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का भी गंभीर उदाहरण माना जाएगा।

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