डिजिटल डेस्क। मिरर मीडिया: झारखंड के कई जिलों में सरकारी और गैर-सरकारी नौकरियों का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से करोड़ों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े ठग गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ‘वीकेएस फाउंडेशन’ नाम से फर्जी एनजीओ चलाकर इस रैकेट ने करीब छह करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया था। सिमडेगा पुलिस की विशेष टीम ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के छह सदस्यों को धर दबोचा है।
ऐसे बुना गया था ठगी का जाल
पुलिस के अनुसार यह शातिर गिरोह ‘नारी पैड सेवा’ और ‘बाल जननी शिक्षा अभियान’ जैसे सामाजिक कार्यों की आड़ में लोगों को अपने जाल में फंसाता था। एनजीओ में अलग-अलग पदों पर भर्ती के नाम पर भारी-भरकम ‘सिक्योरिटी मनी’ वसूली जाती थी। पदों के हिसाब से रेट लिस्ट तय थी।
स्टेट हेड: 3 लाख रुपये
डिस्ट्रिक्ट हेड: 1.50 लाख रुपये
ब्लॉक को-ऑर्डिनेटर: 60 हजार रुपये
सेंटर इंचार्ज: 40 हजार रुपये
यही नहीं नौकरी मिलने के बाद भी विभिन्न तकनीकी मदों के नाम पर कर्मचारियों से लगातार पैसे काटे जाते थे। गिरोह का सरगना खुद को ‘नेशनल हेड’ बताता था और पीड़ितों को व्हाट्सएप के जरिए लुभावने पैकेज और कमीशन के सपने दिखाकर अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित करता था।
दो थानों में दर्ज हैं मामले, एसआईटी ने की कार्रवाई
इस सनसनीखेज खुलासे के पीछे स्थानीय ग्रामीणों की शिकायतें थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी श्रीकांत एस खोटरे के निर्देश पर वरीय डीएसपी रणवीर सिंह और एसडीपीओ धर्मदेव पासवान के नेतृत्व में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया गया था। इस सिलसिले में बानो थाना (कांड संख्या 27/26) और कुरडेग थाना (कांड संख्या 36/26) में मुकदमे दर्ज किए गए थे। तकनीकी सर्विलांस और पुख्ता सुरागों के आधार पर एसआईटी ने जाल बिछाकर छह आरोपियों को दबोच लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अशोक साय, ओम प्रकाश, कुशल केरकेट्टा, सरोज केरकेट्टा, गौरती केरकेट्टा और कुन्दन शर्मा के रूप में हुई है। सभी आरोपियों को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
संपत्ति जब्ती की तैयारी में पुलिस
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि ठगी की इस काली कमाई का इस्तेमाल मुख्य सरगनाओं ने अपनी निजी संपत्ति और अय्याशी में किया है। पुलिस अब इन आरोपियों द्वारा अर्जित की गई अवैध संपत्तियों को चिह्नित कर उनकी जब्ती की कार्रवाई शुरू कर रही है, साथ ही बैंक खातों के जरिए हुए वित्तीय लेन-देन की भी गहराई से छानबीन की जा रही है।
प्रशासन की चेतावनी
जिला प्रशासन और पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संस्था में नौकरी या निवेश के नाम पर पैसे देने से पहले उसकी वैधता की पूरी जांच जरूर कर लें। अगर इस तरह की कोई संदेहास्पद गतिविधि या ठगी का मामला सामने आता है, तो तुरंत अपने नजदीकी थाने को इसकी सूचना दें।

