डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : कहते हैं कि प्रशासनिक लापरवाही के जख्म कभी पूरी तरह नहीं भरते, लेकिन जब सरकार और सिस्टम अपनी गलती मानकर पीड़ितों का हाथ थाम ले, तो न्याय की उम्मीद जरूर जिंदा हो जाती है। पश्चिमी सिंहभूम जिले के सदर अस्पताल के ब्लड बैंक की एक भयानक चूक के कारण एचआईवी संक्रमण का शिकार हुए पांच थैलेसीमिया पीड़ितों के परिवारों को आखिरकार एक नई शुरुआत का सहारा मिला है। जिला प्रशासन ने समाहरणालय परिसर में संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी पांच प्रभावित परिवारों के एक-एक सदस्य को सदर अस्पताल में ही चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी के पद का नियुक्ति पत्र सौंपा।
आंदोलन से हाईकोर्ट तक: ऐसे मिली न्याय की मंजिल
यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि पीड़ितों के परिवारों का एक लंबा और थका देने वाला संघर्ष है। पिछले वर्ष जब थैलेसीमिया से पीड़ित पांच मासूमों को सुरक्षित रक्त की जगह एचआईवी संक्रमित खून चढ़ा दिया गया था, तो पूरे सूबे में हड़कंप मच गया था।
जनता की आवाज: जिला परिषद सदस्य माधव कुंकल के नेतृत्व में ग्रामीणों ने इस घोर लापरवाही के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ा।
हाईकोर्ट की दखल: मामला जब झारखंड सरकार और हाईकोर्ट की चौखट तक पहुंचा, तो सिस्टम को अपनी सुस्ती छोड़नी पड़ी।
सरकार का एक्शन: स्वास्थ्य विभाग की इस बड़ी चूक के बाद खुद स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने चाईबासा पहुंचकर पीड़ितों को ₹2-2 लाख की अंतरिम सहायता दी थी और निष्पक्ष जांच का वादा किया था। उसी जांच और कोर्ट के कड़े रुख का नतीजा है कि आज इन परिवारों को रोजगार की सुरक्षा मिली है।
सिर्फ नौकरी नहीं, मिलेगी पूरी सामाजिक सुरक्षा
हाईकोर्ट और राज्य सरकार के कड़े निर्देशों के बाद उपायुक्त मनीष कुमार और सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने खुद आगे बढ़कर इन परिवारों को नियुक्ति पत्र बांटे। नौकरी पाने वाले ये परिवार चक्रधरपुर, मंझरी, झींकपानी, हाटगम्हरिया और सरायकेला-खरसावां के रहने वाले हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि यह मदद सिर्फ नौकरी तक सीमित नहीं रहेगी। सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी के अनुसार प्रभावित परिवारों को चौतरफा सुरक्षा देने के लिए कई अन्य सरकारी सुविधाओं से भी जोड़ा जा रहा है।
सुरक्षित इलाज: सभी थैलेसीमिया मरीजों को अब नियमित रूप से पूरी तरह सुरक्षित ब्लड और मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा।
दिव्यांगता लाभ: पीड़ितों की मदद के लिए उन्हें 50 प्रतिशत का दिव्यांगता प्रमाणपत्र दिया जा रहा है।
स्वास्थ्य बीमा: बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए सभी को आयुष्मान कार्ड का लाभ मिलेगा।
पेंशन योजना: परिवारों को आर्थिक संबल देने के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना से भी जोड़ा जाएगा।
पश्चिमी सिंहभूम उपायुक्त मनीष कुमार ने कहा कि हम प्रभावित परिवारों के साथ खड़े हैं। इस हादसे के बाद अब यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आगे कभी किसी के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो। इन परिवारों को हर संभव सरकारी सहायता दी जाएगी।
एक सबक जो जरूरी था
यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बदनुमा दाग थी, लेकिन इसके बाद आए फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अगर जनता एकजुट हो और न्यायपालिका सजग रहे, तो प्रशासन को जवाबदेह बनना ही पड़ता है। उम्मीद है कि चाईबासा सदर अस्पताल अब अपने ब्लड बैंक को पूरी तरह फुल-प्रूफ बनाएगा ताकि दोबारा किसी बेगुनाह की जिंदगी दांव पर न लगे।

