September 25, 2022

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उपायुक्त ने दवा खाकर एमडीए अभियान की शुरूआत की, 30 सितंबर तक खिलाई जाएगी अल्बेंडाजोल व डीईसी की दवा, जानिए फाइलेरिया से बचाव के तरीके

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जमशेदपुर : जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में एमडीए अभियान की शुरूआत जिला उपायुक्त विजया जाधव द्वारा कलेक्ट्रेट में डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली खाकर की गई। फाइलेरिया विभाग की ओर से 16-30 सितंबर तक संचालित इस अभियान की शुरुआत करने के बाद जिला उपायुक्त ने सभी लोगों से फाइलेरिया से बचाव के लिए डीईसी और अल्बेंडाजोल की गोली खाने की अपील की।

इस मौके पर उप विकास आयुक्त प्रदीप प्रसाद, सिविल सर्जन डॉ साहिर पाल, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर ने भी डीईसी व अल्बेंडाजोल की गोली खाकर जनसाधारण से इसके सेवन की अपील की। फाइलेरिया रोग उन्मूलन के लिए जमशेदपुर शहरी क्षेत्र में एमडीए-2022 कार्यक्रम 16 से 30 सितम्बर तक चलाया जाना है, जिसमें सभी जनमानस को उम्र के अनुसार डीईसी व अल्बेन्डाजॉल की दवा की एक खुराक खिलाया जाना है। आज यह दवा बूथ पर व 17 से 30 सितंबर तक स्वास्थ्य कर्मी द्वारा घर-घर जाकर अपने समक्ष सभी लक्षित आबादी को खिलाई जाएगी यह दवा पूर्णता सुरक्षित है।

फाइलेरिया से संबंधित जानकारी
1.फाइलेरिया एक ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से प्रभावित अंगों जैसे हाथ पांव (हाथीपांव) का फूलना और हाइड्रोसिल होता है।

2.फाइलेरिया एक वूचेरिया बैन्क्रापटी रोगाणु की वजह से होता है जा क्यूलेक्स मच्छर के द्वारा फैलता है।

3.क्यूलेक्स मच्छर जमे हुए गंदे पानी में पैदा होते हैं ।

4.फाइलेरिया का उपचार डीईसी गोली के द्वारा किया जाता है जो एक बहुत ही कारगर दवा है।

5. यदि सभी व्यक्तियों को डीईसी, आइभरमेक्टीन व अलबेण्डाजोल गोली की एक खुराक वर्ष में एक बार खिलायी जाये तो 80 से 90 प्रतिशत तक इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।

6.फाइलेरिया की दवा किसी भी स्थिति में खाली पेट नहीं ली जानी चाहिए।

7.फाइलेरिया प्रभावित क्षेत्र में 2 से 5 वर्षों तक वर्ष में एक बार अभियान के तौर पर लक्षित व्यक्तियों को डीईसी व अलबेण्डाजोल दवा खिलाकर फाइलेरिया पर नियंत्रण पाया जा सकता है। फाइलेरिया के रोगाणु अपने पूरे जीवन काल में करोड़ों माइक्रोफाइलेरिया रोगाणुओं को जन्म देते हैं। दवा वितरण के प्रत्येक अभियान के द्वारा माइक्रोफाइलेरिया के रोगाणुओं को समुदाय में फैलने से रोका जा सकता है, जिससे मच्छरों के द्वारा अन्य स्वस्थ्य व्यक्तियों को इसके संक्रमण से बचाया जा सकता हैं।

क्या करें
उम्र के अनुसार दवा की सही खुराक का प्रयोग करें। भोजन के बाद ही दवा का सेवन करें। परिवार के सभी सदस्य दवा का सेवन करें व अन्य व्यक्तियों को दवा लेने के लिए प्रेरित करें।दवा खाने के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभाव की जानकारी लेने एवं देने का प्रयास करें। गंदे जमी पानी को बहाने के लिए प्रेरित करें।

क्या नहीं करें
2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे को दवा का सेवन नहीं करायें।गर्भवती महिलाओं को फाइलेरिया की दवा न दें। किसी भी स्थिति में खाली पेट में इस दवा का सेवन न करें। गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए।अत्यधिक वृद्ध व्यक्ति को यह दवा नहीं दी जानी चाहिए।

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