डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: रेलवे द्वारा बारीगोड़ा और गोविंदपुर रेलवे फाटक पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण के लिए अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस प्रोजेक्ट की वजह से क्षेत्र के 120 से अधिक मकान और दुकानें बुलडोजर की जद में आ सकते हैं। रेलवे की इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
12 अगस्त तक खुद अतिक्रमण हटाने का अल्टीमेटम
रेलवे के अधिकारियों ने बारीगोड़ा में 44 मकानों और दुकानों पर नोटिस चिपकाकर उन्हें हटाने का निर्देश दिया। वहीं, गोविंदपुर क्षेत्र के 50 से अधिक मकानों-दुकानों को नोटिस थमाया जा रहा है। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि 12 अगस्त तक सभी लोग खुद से अपना अतिक्रमण हटा लें। तय सीमा के बाद जबरन अतिक्रमण हटाया जाएगा और इसमें आने वाला खर्च भी संबंधित कब्जाधारियों से ही वसूला जाएगा।
रेलवे की कार्रवाई के खिलाफ एकजुट हुए ग्रामीण, पुनर्वास की मांग
अचानक मिले इस नोटिस के बाद बारीगोड़ा और आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल है। लोग अब इस फैसले के खिलाफ गोलबंद होने लगे हैं। हाल ही में हुई एक बैठक में पूर्व जिला परिषद सदस्य कुसुम पूर्ति समेत कई स्थानीय प्रतिनिधि शामिल हुए और इस कार्रवाई का विरोध करने का फैसला लिया।
स्थानीय लोगों और प्रतिनिधियों का कहना है कि अगर रेलवे सालों से बसे लोगों को हटाना चाहता है, तो पहले उन्हें उचित मुआवजा दे या पुनर्वास की व्यवस्था करे।
112.83 करोड़ रुपये की लागत से बनेगा ओवरब्रिज
जमशेदपुर प्रखंड के बारीगोड़ा (LC-137) और गोविंदपुर (LC-138) रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज का निर्माण प्रस्तावित है।
शिलान्यास: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 फरवरी 2024 को इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था।
लागत: एलसी-137 के लिए ₹43.85 करोड़ और एलसी-138 के लिए ₹68.98 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं (कुल लागत ₹112.83 करोड़)।
स्थिति: 12 मई को इसका टेंडर खोला गया था और फिलहाल एजेंसी चयन की प्रक्रिया जारी है।
पहले यह प्रोजेक्ट राज्य सरकार और रेलवे की संयुक्त एजेंसी द्वारा पूरा होना था, लेकिन काम में देरी के कारण अब इसे रेलवे द्वारा एकल एजेंसी के माध्यम से पूरा कराया जा रहा है।

