हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे देश को हैरान कर दिया है, जहाँ होमवर्क न करने पर टीचर के डांटने और थप्पड़ मारने के बाद 6 साल के बच्चे की मौत हो गई। CCTV फुटेज में यह देखा गया कि बच्चा टीचर की गोद में गिर गया और अस्पताल पहुंचने तक उसकी जान चली गई, जिससे माता-पिता ने दहशत में हार्ट अटैक आने का आरोप लगाया है और पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इस दर्दनाक हादसे ने देशभर के अभिभावकों को गहरी चिंता में डाल दिया है और उनके मन में यह सवाल पैदा कर दिया है कि क्या भारत में स्कूलों के बच्चों की पिटाई को लेकर कोई कानून है। इसका जवाब यह है कि देश के स्कूलों में बच्चों की पिटाई पूरी तरह बैन है और यदि बच्चे की मौत हो जाती है तो टीचर को जेल व जुर्माने की सजा का प्रावधान है, साथ ही NCPCR द्वारा भी कड़ी गाइडलाइंस जारी की गई हैं।
बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाले राष्ट्रीय आयोग (NCPCR) की गाइडलाइंस के अनुसार, स्कूल में बच्चे को ऐसा दंड देना जिससे दर्द या तकलीफ हो, शारीरिक सजा माना जाता है जिसमें थप्पड़ मारना, मुर्गा बनाना, छड़ी से पीटना और कुर्सी पर खड़ा करना शामिल है। इसके तहत स्कूलों में बच्चों की शिकायत सुनने के लिए प्रोटोकॉल, जगह-जगह ड्रॉप बॉक्स और दो टीचर्स, दो अभिभावकों, एक डॉक्टर, एक वकील, एक काउंसलर, एक चाइल्ड राइट्स एक्टिविस्ट व दो सीनियर स्टूडेंट वाले कॉरपोरेल पनिशमेंट मॉनिटरिंग सेल बनाने का निर्देश दिया गया है।
कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act 2009) की धारा 17 के तहत भारत के स्कूलों में बच्चों को शारीरिक दंड देना या मानसिक रूप से प्रताड़ित करना कानूनन अपराध है। धारा 17(1) में बच्चों को किसी भी तरह का शारीरिक दंड या मानसिक प्रताड़ना देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, जबकि धारा 17(2) के तहत पिटाई करने वाले दोषी टीचर या कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान तय किया गया है।
इसके अतिरिक्त, किशोर न्याय अधिनियम (Juvenile Justice Act) की धारा 75 के तहत यदि स्कूल या क्रैच में बच्चे की पिटाई की जाती है या क्रूरता से मानसिक-शारीरिक तकलीफ दी जाती है, तो कानूनी कार्रवाई के तहत जेल जाना पड़ सकता है। इसमें 5 साल तक की जेल की सजा और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लग सकता है, तथा गंभीर मामलों में 10 साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है।
यदि स्कूल में शिक्षक की पिटाई के कारण किसी छात्र की मृत्यु हो जाती है, तो इसे गंभीर अपराध मानते हुए आरोपी शिक्षक और स्कूल प्रबंधन पर BNS और बाल सुरक्षा कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जाता है। इसके तहत गैर-इरादतन हत्या (BNS धारा 105) में 10 साल से आजीवन कारावास, हत्या (BNS धारा 103) में उम्रकैद या मृत्युदंड, बच्चों के प्रति क्रूरता (JJ Act धारा 75) में 5 से 10 साल की कैद, और RTE Act के तहत दंडात्मक व अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है।

