डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : झारखंड के जमशेदपुर में निखार सबलोक हत्याकांड की गूंज अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि शहर को एक बार फिर दहलाने की बड़ी साजिश का पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया है। सीतारामडेरा थाना पुलिस ने भुइयांडीह बस स्टैंड के पास से उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर से बुलाए गए दो पेशेवर शूटरों को धर दबोचा। इनके पास से पुलिस ने एक लोडेड देसी पिस्टल और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों की पहचान उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी प्रदीप सिंह और अभिनय यादव के रूप में हुई है। एएसपी ऋषभ त्रिवेदी ने एसएसपी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरी कार्रवाई का खुलासा किया।
शौचालय के पीछे छिपने की फिराक में थे बदमाश
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने भुइयांडीह बस स्टैंड के आसपास घेराबंदी की थी। पुलिस बल को अपनी ओर आते देख दोनों संदिग्ध शौचालय के पीछे छिपने की कोशिश करने लगे, लेकिन सतर्क पुलिसकर्मियों ने उन्हें भागने का कोई मौका नहीं दिया और दबोच लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से अवैध हथियार और गोलियां बरामद हुई।
अशोक और सिंटू के इशारे पर आए थे जमशेदपुर
प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि वे अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव और अभिमन्यु सिंह उर्फ सिंटू सिंह के बुलावे पर जमशेदपुर पहुंचे थे। उनका मुख्य मकसद गणेश सिंह गिरोह के एक खास सदस्य को रास्ते से हटाना था। सुरक्षित ठौर-ठिकाने के लिए उन्हें सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के कुम्हारपाड़ा स्थित अशोक कुमार के मकान में ठहराया गया था, जहां उलीडीह निवासी सुनील रजक ने उनके रहने और हथियारों का बंदोबस्त किया था।
19 अगस्त को भी आए थे, पैसे के विवाद के कारण लौटे थे यूपी
गिरफ्तार शूटरों ने पुलिस को बताया कि वे इससे पहले 19 अगस्त को भी निखार सबलोक की हत्या के इरादे से जमशेदपुर आए थे। उस दौरान उनके साथ राहुल विश्वकर्मा नाम का एक अन्य शख्स भी मौजूद था। हालांकि सुपारी की आधी रकम एडवांस में मांगने को लेकर मुख्य साजिशकर्ता सिंटू सिंह के साथ उनका विवाद हो गया था, जिसके चलते वे बिना घटना को अंजाम दिए वापस उत्तर प्रदेश लौट गए थे। निखार हत्याकांड के बाद सिंटू और राघव ने एक बार फिर दोनों से संपर्क साधा और उन्हें शहर बुलाया।
तय नहीं हुआ था टारगेट, उससे पहले ही बिछ गया पुलिस का जाल
शूटरों ने पुलिस को बताया कि इस बार उन्हें सिर्फ इतना निर्देश मिला था कि गणेश सिंह गिरोह के किसी अहम सदस्य को निशाना बनाना है। वे अपने आकाओं से फाइनल टारगेट का नाम, हत्या की तारीख और सुपारी की तय रकम की जानकारी मिलने का इंतजार कर रहे थे। इससे पहले कि साजिश का अगला पन्ना खुलता, खाकी ने दोनों को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। फिलहाल, पुलिस इस पूरे सिंडिकेट को खंगालने में जुटी है। हथियार मुहैया कराने वाले सुनील रजक और पर्दे के पीछे रहकर खूनी खेल की पटकथा लिखने वाले अन्य फरार आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी की जा रही है।

