डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: झारखंड के प्रसिद्ध दलमा वन्यजीव अभयारण्य में नियमों को ताक पर रखकर किए गए कथित अवैध निर्माणों और पर्यटक कॉटेज के मामलों पर शिकंजा कसता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए आगामी 9 सितंबर को नई दिल्ली स्थित चाणक्य भवन में सुनवाई तय की है। इस उच्चस्तरीय बैठक पर प्रशासनिक हलकों की निगाहें टिक गई हैं।
मुख्य सचिव और संबंधित विभागों को तलब
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय समिति ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव समेत तमाम संबंधित विभागों को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। समिति के निर्देश के अनुसार सभी पक्षों को सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखना होगा। साथ ही, अगर कोई पक्ष इस मामले से जुड़े कोई अतिरिक्त दस्तावेज या साक्ष्य प्रस्तुत करना चाहता है, तो उसे सुनवाई से कम से कम तीन दिन पूर्व जमा करना अनिवार्य किया गया है।
एनबीडब्ल्यूएल की मंजूरी के बिना निर्माण का गंभीर आरोप
यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक जनहित याचिका से जुड़ा हुआ है, जिसमें वन व वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जमशेदपुर के वकील प्रदीप शर्मा द्वारा सीईसी के समक्ष दिए गए आवेदन में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया है कि दलमा अभयारण्य के भीतर राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की अनिवार्य अनुमति लिए बगैर कई संरचनाओं का निर्माण कराया गया है। याचिकाकर्ता ने इन अनाधिकृत निर्माण कार्यों पर तत्काल रोक लगाने, नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए गए ढांचों को नेस्तनाबूद करने और पर्यावरण कानूनों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है।
नए 15 पर्यटक कॉटेज के भविष्य पर मंडराया संकट
इस पूरी कानूनी और प्रशासनिक खींचतान का सीधा असर दलमा क्षेत्र में हाल ही में बनकर तैयार हुए 15 नए पर्यटक कॉटेज पर पड़ सकता है। हालांकि इन कॉटेज का उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है, लेकिन इन्हें अभी तक पर्यटकों के आवागमन के लिए आधिकारिक तौर पर नहीं खोला गया है। दूसरी ओर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने भी इको-संवेदनशील जोन के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बिना वैध अनुमति के हो रहे पर्यटन संबंधी निर्माणों पर तीखा एतराज जताया है। उन्होंने न सिर्फ इन अवैध निर्माणों की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार लापरवाह अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की आवाज उठाई है। अब 9 सितंबर को होने वाली इस महत्वपूर्ण सुनवाई के बाद ही दलमा के इन नए कॉटेज और वहां चल रहे निर्माण कार्यों के भविष्य को लेकर तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकेगी।

