डिजिटल डेस्क।मिरर मीडिया : सिक्किम के गेजिंग जिले में स्थित रिम्बी गांव इन दिनों कुदरत के कड़े इम्तिहान से गुजर रहा है। पिछले डेढ़ महीने से जारी लगातार भूस्खलन और मूसलाधार बारिश ने इस पूरे इलाके को मलबे के ढेर में तब्दील करना शुरू कर दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रशासन और स्थानीय लोगों को मिलकर पूरा गांव खाली कराना पड़ा है।
हालात का जायजा
आशियाने उजड़े, घर छोड़ने को मजबूर लोग: पहाड़ से लगातार गिरते मलबे ने कई घरों को अपनी आगोश में ले लिया है। जान बचाने की जद्दोजहद में ग्रामीण अपने घरों से सिर्फ जरूरी दस्तावेज और कुछ कपड़े ही निकाल पाए हैं, जबकि बाकी गृहस्थी मलबे के बीच ही छूट गई है।
सड़क संपर्क कटा और बदला नदी का रुख: रिम्बी को युक्सोम से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इसके अलावा, पहाड़ी से बहकर आए भारी मलबे के कारण रिम्बी नदी का प्राकृतिक बहाव भी बदल गया है, जिससे नदी के दूसरे छोर पर बसे इलाकों पर भी बड़ा खतरा मंडराने लगा है।
आजीविका पर संकट: कभी बड़े पैमाने पर बड़ी इलायची की खेती के लिए मशहूर इस क्षेत्र के खेत अब पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। ग्रामीणों के सामने सिर पर छत के साथ-साथ अपनी रोजी-रोटी बचाने का भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन की सक्रियता: इस गंभीर आपदा पर राज्य के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने गहरा दुख जताया है और प्रभावित परिवारों को सरकार की तरफ से हरसंभव मदद तथा सुरक्षा का भरोसा दिलाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षेत्र में छोटे-छोटे प्राकृतिक जलस्रोतों के होने और लगातार हो रही बारिश की वजह से जमीन धंसने की यह समस्या विकराल रूप लेती जा रही है। फिलहाल, प्रशासन और ग्रामीणों की पहली प्राथमिकता सभी परिवारों की सुरक्षित आवाजाही और राहत शिविरों में उनके रहने की पुख्ता व्यवस्था करना है।

