Bihar: मां के दूध में ‘जहर’, ब्रेस्ट मिल्क में मिला यूरेनियम, बिहार के 6 जिलों की स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा

Neelam
By Neelam
3 Min Read

मां का दूह बच्चे के लिए अमृत माना गया है। हालांकि, दावा किया जा रहा है कि मां का यही दूध नवजात की सेहत पर असर डाल सकता है। बिहार के छह जिलों में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम (यू-238) की मौजूदगी का दावा किया जा रहा है। महावीर कैंसर संस्थान, पटना और एम्स नई दिल्ली की संयुक्त की स्टडी के बात ये बात सामने आई है।

40 नमूनों में यूरेनियम पाया गया

महावीर कैंसर संस्थान, पटना और एम्स नई दिल्ली की संयुक्त स्टडी में यह बात सामने आई है कि राज्य के छह जिलों भोजपुर, समस्तीपुर, मुंगेर, भागलपुर, खगड़िया और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम पाया गया है। अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच की गई इस जांच में 17 से 35 साल की 40 माताओं के दूध के नमूने लिए गए और चौंकाने वाली बात यह रही कि सभी के दूध में यूरेनियम मौजूद था। वैज्ञानिकों के अनुसार सबसे ज्यादा स्तर खगड़िया में और सबसे कम नालंदा में पाया गया।

पानी के जरिए शरीर में पहुंच रहा यूरेनियम

नमूनों में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही। इस स्टडी का नेतृत्व महावीर कैंसर संस्थान के डॉ. अरुण कुमार ने किया। एम्स नई दिल्ली के डॉ. अशोक शर्मा रिसर्च के सह लेखक रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यूरेनियम भूजल के जरिए शरीर में पहुंच रहा है, क्योंकि इन जिलों में पानी पहले से ही दूषित बताया जाता रहा है। यह दूषित पानी पीने और भोजन के माध्यम से शरीर में जाता है और फिर माताओं के दूध में पहुंचकर बच्चों के लिए खतरा पैदा करता है। 

70% शिशुओं में जोखिम का संकेत

एम्स दिल्ली के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा ने कहा, 70% शिशुओं में जोखिम का संकेत जरूर मिला है, लेकिन स्वास्थ्य पर इसका वास्तविक प्रभाव कम होने की संभावना है। माताओं को स्तनपान बंद करने की कोई जरूरत नहीं है। यह शिशु के पोषण का सबसे सुरक्षित और प्रभावी स्रोत है।

पीने के पानी और अनाज में घुल रहा जहर

बिहार के 6 जिलों में लोगों का पीने का पानी और खाने का अनाज धीरे-धीरे जहर में बदलता जा रहा है। स्टडी में टीम ने बिहार के पटना, वैशाली, सारण, भोजपुर, बक्सर और नालंदा जिलों में सर्वे किया। कुल 286 घरों से हैंडपंप के पानी, गेहूं, चावल, बाल और नाखून के नमूने एकत्र किए गए। जांच में लगभग 14% हैंडपंपों के पानी, 44% गेहूं और 3% चावल के नमूनों में आर्सेनिक की मात्रा तय सीमा से अधिक पाई गई। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय की है। जर्मनी सहित कुछ देशों में यह सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है। 

Share This Article