बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर राज्यव्यापी दौरे पर निकलने जा रहे हैं। 16 जनवरी से शुरू होने वाली इस महत्वाकांक्षी यात्रा को ‘समृद्धि यात्रा’ नाम दिया गया है। जिसकी शुरुआत परंपरागत रूप से पश्चिम चंपारण के बेतिया से होगी। यह यात्रा लगातार 8 दिनों तक चलेगी और इसके तहत बिहार के 8 प्रमुख जिलों को कवर किया जाएगा।

सीएम नीतीश की इस यात्रा का शुभारंभ ऐतिहासिक धरती पश्चिम चंपारण से होगा। बेतिया पहुंचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जीविका दीदियों के साथ जनसंवाद करेंगे और सीधे उनसे योजनाओं की जमीनी हकीकत, समस्याएं और सुझाव जानेंगे। इसके साथ ही मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा के दौरान किए गए शिलान्यास और उद्घाटन कार्यों की समीक्षा भी करेंगे, ताकि यह आकलन किया जा सके कि सरकारी योजनाएं आम लोगों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच पाई हैं।
यात्रा का शेड्यूल्ड
पश्चिम चंपारण से शुरू होकर ये कारवां 17 जनवरी को पूर्वी चंपारण पहुंचेगा। इसके बाद 19 जनवरी को मुख्यमंत्री सीतामढ़ी और शिवहर जिलों का दौरा करेंगे। यात्रा के अगले चरणों में 20 जनवरी को गोपालगंज, 21 जनवरी को सिवान, 22 जनवरी को सारण, 23 जनवरी को मुजफ्फरपुर और अंत में 24 जनवरी को वैशाली जिले में इस यात्रा का समापन होगा। प्रत्येक जिले के लिए एक दिन का समय निर्धारित किया गया है, ताकि मुख्यमंत्री गहनता से योजनाओं का निरीक्षण कर सकें और अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कर सकें।
बिहार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर फोकस
समृद्धि यात्रा के जरिए सरकार का फोकस विकास कार्यों की गति बढ़ाने और बिहार को आर्थिक रूप से और अधिक सशक्त बनाने पर रहेगा। समृद्धि यात्रा केवल एक औपचारिक दौरा नहीं है, बल्कि इसके जरिए मुख्यमंत्री विकास की नई इबारत लिखने की तैयारी में हैं।
प्रशासनिक तैयारियां तेज
इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने सभी विभागों को पत्र भेजा है। इसमें अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, प्रभारी सचिव, डीजीपी, प्रमंडलीय आयुक्त, आईजी, डीआईजी, जिलाधिकारी, एसएसपी और एसपी को यात्रा की पूरी जानकारी दी गई है। पत्र के साथ समीक्षा बैठकों का विस्तृत कार्यक्रम भी शेयर किया गया है।
‘जन संवाद‘ पर होगा सबसे ज्यादा जोर
यात्रा के दौरान वे विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास, उद्घाटन और नए कार्यों का शुभारंभ करेंगे। इसके अलावा, नीतीश कुमार का सबसे ज्यादा जोर ‘जन संवाद’ पर होगा। वे सीधे आम जनता से मुलाकात करेंगे, उनकी समस्याओं को सुनेंगे और ऑन-द-स्पॉट उनके समाधान के निर्देश संबंधित अधिकारियों को देंगे।

