डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर : जुगसलाई नगर परिषद के चुनाव परिणामों ने इस बार एक दिलचस्प और ऐतिहासिक तस्वीर पेश की है। अमूमन राजनीति में परिवारवाद को नकारात्मक नजरिए से देखा जाता है, लेकिन जुगसलाई में एक ही घर के दो भाइयों ने अपने-अपने वार्ड से जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया है कि अगर रणनीति सही हो और जमीनी स्तर पर काम किया जाए, तो जनता सिर आंखों पर बिठाती है।
वार्ड नंबर-7 से राहत हुसैन ने 1373 मत हासिल कर परचम लहराया, तो दूसरी तरफ उनके भाई जीशान हुसैन ने वार्ड नंबर-4 से 1220 वोट पाकर जीत का डंका बजाया। एक ही छत के नीचे रहने वाले इन दोनों भाइयों ने चुनाव में अपनी अलग-अलग और स्वतंत्र पहचान बनाई।
रणनीति जिसने दिलाई जीत
राहत का ‘बेसिक’ दांव: राहत हुसैन ने हवा-हवाई वादों के बजाय बुनियादी मुद्दों जैसे—सफाई, सड़क और पेयजल को अपना हथियार बनाया और सीधा जनसंपर्क किया।
जीशान का ‘यूथ’ कार्ड: वहीं, जीशान हुसैन ने युवाओं और महिलाओं की नब्ज पकड़ी और उनके बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई।
मतगणना केंद्र के बाहर जैसे ही जीत का ऐलान हुआ, समर्थकों ने दोनों भाइयों को कंधों पर उठा लिया। स्थानीय बुजुर्ग अब्दुल सलाम इस जीत को ऐतिहासिक बताते हैं, तो वहीं युवा कार्यकर्ता सोनू का कहना है कि यह जीत केवल नाम की नहीं, बल्कि उस पसीने की है जो दोनों भाइयों ने जनता के बीच बहाया है। राजनीतिक पंडितों का भी मानना है कि मतदाता अब रिश्तों पर नहीं, बल्कि कार्यशैली और संवाद पर मुहर लगा रहा है। जुगसलाई की जनता ने इतिहास तो बना दिया है, लेकिन अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ये दोनों भाई विकास के वादों को जमीन पर कैसे उतारते हैं।

