बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे आधिकारिक तौर पर जारी कर दिए गए हैं। परिणामों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की। नतीजों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन, शिवेश कुमार और उपेंद्र कुशवाहा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए। वहीं, महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्रधारी सिंह उर्फ एडी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर
राज्यसभा चुनाव के बहाने बिहार की राजनीति में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिला। चुनावी गणित जहां महागठबंधन के पक्ष में जाता हुआ दिखाई दे रहा था, वहीं मतदान के दिन चार विधायकों की गैरहाजिरी ने पूरा समीकरण बदल दिया। नतीजतन, एनडीए ने पांचों सीटों पर जीत हासिल की और महागठबंधन की रणनीति विफल हो गई।
एनडीए उम्मीदवारों को कितने वोट मिले?
चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को प्रथम वरीयता के 44 वोट मिले, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को भी 44 मत प्राप्त हुए। वहीं राष्ट्रीय लोक मोर्चा के उपेंद्र कुशवाहा को 42 और जदयू के रामनाथ ठाकुर को भी 42 वोट मिले।
आरजेडी उम्मीदवार को कितने वोट मिले?
वहीं, महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को केवल 37 वोट मिले। इसके बाद द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती में बीजेपी के उम्मीदवार शिवेश राम की जीत के साथ ही पांचवीं सीट भी एनडीए के खाते में चली गई।
पांचवी सीट पर ऐसे हुआ एनडीए का कब्जा
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए जरूरी वोटों का कोटा एक विशेष गणित से तय होता है। कुल वैध मतों को उपलब्ध सीटों से एक अधिक संख्या से भाग देकर और उसमें एक जोड़कर कोटा निकाला जाता है। बिहार में 239 विधायकों ने मतदान किया। पांच सीटों के चुनाव में इस गणना के अनुसार जीत का कोटा लगभग 41 वोट के आसपास बना। यानी किसी उम्मीदवार को जीत के लिए लगभग 41 विधायकों का समर्थन चाहिए था। एनडीए के पास विधानसभा में मजबूत संख्या बल था। इसके कारण गठबंधन के चार उम्मीदवारों को आसानी से आवश्यक कोटा मिल गया। इन उम्मीदवारों को प्रथम वरीयता के पर्याप्त वोट मिल गए और वे सीधे निर्वाचित हो गए। अगर किसी उम्मीदवार को कोटा से ज्यादा वोट मिलते हैं तो अतिरिक्त वोटों को सरप्लस कहा जाता है। इन सरप्लस वोटों को निर्धारित अनुपात में अन्य उम्मीदवारों के खाते में ट्रांसफर किया जाता है। बिहार के चुनाव में एनडीए के पहले चार उम्मीदवारों को कोटा से ज्यादा वोट मिले। इन अतिरिक्त वोटों का ट्रांसफर द्वितीय वरीयता के आधार पर पांचवें उम्मीदवार शिवेश कुमार के खाते में होता गया। इस प्रक्रिया के बाद शिवेश कुमार का कुल वोट वैल्यू बढ़कर आवश्यक कोटा से ऊपर पहुंच गया। इसके कारण वे जीतने में सफल रहे
तेजस्वी यादव की रणनीति हुई फेल
दरअसल, महागठबंधन की ओर से नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने संख्या जुटाने के लिए रणनीति बनाई थी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के पांच विधायकों तथा मायावती की पार्टी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक का समर्थन भी हासिल कर लिया था। संख्याबल के इस समीकरण के बाद महागठबंधन को भरोसा था कि पांचवीं सीट उसके खाते में जाएगी, लेकिन मतदान के समय उसके चार विधायक वोट डालने नहीं पहुंचे और यहीं से पूरा समीकरण बदल गया। इन चार वोटों की कमी ने महागठबंधन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया और राजग को निर्णायक बढ़त मिल गई।

