RTE नामांकन में गड़बड़ियों पर अभिभावक महासंघ का बड़ा हमला, सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

KK Sagar
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बिहार में शिक्षा के अधिकार (RTE) अधिनियम के तहत नामांकन प्रक्रिया को लेकर अव्यवस्था के आरोपों के बीच बिहार अभिभावक महासंघ ने सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष कई अहम मांगें रखी हैं।

पोषक क्षेत्र के विद्यालयों को पहली प्राथमिकता

महासंघ ने कहा है कि बच्चों का नामांकन उनके पोषक क्षेत्र (कैचमेंट एरिया) के विद्यालयों को छोड़कर 6 किलोमीटर से अधिक दूर स्थित स्कूलों में किया जा रहा है, जो नियमों के विपरीत है। इसे तुरंत रोकते हुए पोषक क्षेत्र के विद्यालयों को पहली प्राथमिकता देने और पुनः आवंटन प्रक्रिया चलाने की मांग की गई है।

कई निजी विद्यालयों में सीटें अब भी खाली

संगठन ने यह भी बताया कि कई निजी विद्यालयों में RTE के तहत निर्धारित 25% सीटें अब भी खाली पड़ी हैं। ऐसे में एक और नामांकन तिथि घोषित कर वंचित और जरूरतमंद बच्चों को इन सीटों पर प्रवेश का अवसर देने की अपील की गई है।

फर्जी दस्तावेजों की जांच की मांग

फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हो रहे नामांकन पर चिंता जताते हुए महासंघ ने कहा कि वर्तमान में विद्यालय ऐसे मामलों में भी नामांकन लेने को बाध्य हैं। इसलिए स्कूलों को दस्तावेजों की जांच का अधिकार दिया जाना चाहिए, ताकि सही और पात्र बच्चों का चयन सुनिश्चित हो सके।

निःशुल्क पुस्तकें और पोशाक के एवज में फीस वसूली पर रोक

इसके साथ ही RTE के तहत नामांकित बच्चों को निःशुल्क पुस्तकें और पोशाक उपलब्ध कराने तथा किसी भी प्रकार की फीस वसूली पर सख्ती से रोक लगाने के लिए निजी विद्यालयों को स्पष्ट निर्देश जारी करने की मांग की गई है।

निर्धारित समय सीमा में नामांकन की मांग

महासंघ ने यह भी कहा कि जिन विद्यालयों को बच्चों का आवंटन किया गया है, यदि वे निर्धारित समय सीमा में नामांकन सुनिश्चित नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

ज्ञानदीप पोर्टल पर भी उठे सवाल

वहीं, ज्ञानदीप पोर्टल को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। महासंघ का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन करने के बावजूद अब तक कई बच्चों को विद्यालय आवंटित नहीं किया गया है और न ही कोई आधिकारिक सूचना दी जा रही है। ऐसे में विभाग से जल्द से जल्द स्कूल आवंटन प्रक्रिया पूरी करने की मांग की गई है, ताकि बच्चों का समय पर नामांकन सुनिश्चित हो सके।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि इन समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया, तो वे व्यापक स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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