कोलकाता: भारतीय निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मद्देनज़र तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य की 294 सीटों पर दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
चुनावी माहौल के बीच इस बार सबसे बड़ा मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर बना हुआ है। इसी क्रम में आयोग ने शनिवार को तीसरी पूरक मतदाता सूची जारी कर दी है। हालांकि, आयोग की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इस सूची में कितने नाम जोड़े गए या हटाए गए हैं।
इससे पहले शुक्रवार रात को दूसरी पूरक सूची जारी की गई थी, जबकि सोमवार को ‘विचाराधीन’ मतदाताओं की पहली पूरक सूची सामने आई थी। लेकिन इन सूचियों में शामिल या हटाए गए नामों की संख्या सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर विपक्षी दलों और अन्य पक्षों ने सवाल उठाए हैं।
निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी के अनुसार, पूरक सूची उन मतदाताओं की अतिरिक्त सूची होती है जो अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद जोड़े जाते हैं। इसमें नए मतदाता, विवरणों में सुधार और सत्यापन के बाद बहाल किए गए नाम शामिल होते हैं। इसके साथ ही, डुप्लीकेट नाम, मृत्यु या निवास स्थान बदलने जैसे कारणों से हटाए गए मतदाताओं की अलग विलोपन सूची भी जारी की जाती है।
राजनीतिक मोर्चे पर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 291 उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और 3 सीटें अपने सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (BGPM) के लिए छोड़ी हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भवानीपुर सीट से चुनाव मैदान में हैं।
वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अब तक करीब 274 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर और उनकी पारंपरिक सीट नंदीग्राम—दोनों जगहों से मैदान में उतारा है।
मतदाता सूची को लेकर जारी विवाद के बीच अब सभी की नजरें आगामी मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो राज्य की राजनीति की दिशा तय करेंगे।

