डिजिटल डेस्क। जमशेदपुर: टाटा कमिंस के कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी खबर है, तो दूसरी ओर एक नया विवाद भी खड़ा हो गया है। टाटा मेन अस्पताल स्थित टाटा 1mg स्टोर से कर्मचारियों को दोबारा दवाएं मिलना शुरू हो गई हैं। प्रबंधन द्वारा परचेज ऑर्डर जारी होने के बाद अब कर्मचारी डॉक्टर की पर्ची दिखाकर दवाएं ले पा रहे हैं।
दवा सुविधा पर क्रेडिट वॉर
दवा सुविधा बहाल होते ही यूनियन के भीतर राजनीति भी तेज हो गई है। यूनियन के सत्ता पक्ष का कहना है कि यह तकनीकी समस्या थी जिसे बातचीत के जरिए सुलझा लिया गया है। वहीं, विपक्ष का दावा है कि उनके लगातार दबाव और विरोध के कारण ही प्रबंधन को यह सुविधा दोबारा शुरू करनी पड़ी।
OT भुगतान पर बढ़ा तनाव: यूनियन ने एचआर हेड को भेजा मेल
दवाओं का मामला सुलझते ही अब यूनियन का पूरा ध्यान ओवरटाइम (OT) भुगतान के मुद्दे पर टिक गया है। यूनियन की बैठक में यह बात सामने आई कि प्रबंधन ने ओटी की गणना के नियमों में बदलाव कर दिया है।
क्या है मुख्य विवाद?
यूनियन के अनुसार 2018 के समझौते के तहत ओटी की राशि बेसिक + डीए + अलाउंस को जोड़कर दी जानी थी। आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी सूचना के अब ओटी की गणना को केवल बेसिक और डीए तक सीमित कर दिया है। इससे कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
अगला कदम: प्लांट हेड को सौंपा जाएगा ज्ञापन
यूनियन ने इस मामले को लेकर एचआर हेड पल्लवी देसाई को ईमेल के जरिए अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है। यूनियन का एक प्रतिनिधिमंडल जमशेदपुर प्लांट हेड और एचआर हेड से मुलाकात कर उन्हें औपचारिक ज्ञापन सौंपेगा। यूनियन के सख्त रुख को देखते हुए आने वाले दिनों में प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच टकराव बढ़ने के आसार हैं।

