डिजिटल डेस्क।जमशेदपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है जो निजी अस्पतालों की आड़ में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का काला कारोबार कर रहा था। इस मामले में पुलिस ने दो डॉक्टरों और अस्पताल संचालक समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि कई नामचीन डॉक्टर अभी भी फरार हैं।
कैसे खुला राज?
मामले का खुलासा तब हुआ जब मेरठ के एक एमबीए छात्र आयुष ने किडनी के बदले तय रकम न मिलने की शिकायत की। आयुष का सौदा 4 लाख रुपये में हुआ था, लेकिन उसे पैसे नहीं मिले। जांच में पता चला कि केशवपुरम स्थित आहूजा अस्पताल में आयुष की किडनी निकालकर मेरठ की एक महिला मरीज पारुल को लगा दी गई थी।
ऑपरेशन के वक्त स्टाफ की कर दी जाती थी छुट्टी
जांच में बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है। आहूजा अस्पताल में जब भी अवैध ट्रांसप्लांट होता था, उस रात पूरे अस्पताल स्टाफ को छुट्टी पर भेज दिया जाता था ताकि किसी को भनक न लगे। यह पूरा रैकेट टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए संचालित हो रहा था, जिसमें दिल्ली, लखनऊ, मेरठ और बिहार के लोग जुड़े हुए थे।
करोड़ों में होता था सौदा
पुलिस के मुताबिक एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीज से 60 लाख से 1 करोड़ रुपये तक वसूले जाते थे। दिल्ली और लखनऊ से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाकर सर्जरी कराई जाती थी। अब तक की जांच में करीब 11 अस्पतालों के नाम सामने आए हैं, जहां पिछले कुछ समय में 40 से 50 अवैध ट्रांसप्लांट होने की आशंका है।
प्रमुख गिरफ्तारियां और फरार आरोपी
डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (संचालक, आहूजा अस्पताल) और उनकी पत्नी डॉ. प्रीति।
डॉ. राजेश कुमार (आरोही अस्पताल) और डॉ. नरेंद्र सिंह।
शिवम अग्रवाल (बिचौलिया/एंबुलेंस चालक) और राम प्रकाश।
फरार आरोपी: डॉ. रोहित (लखनऊ), डॉ. अफजल (मेरठ), डॉ. अनुराग और वैभव की तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।
विदेशी कनेक्शन भी आया सामने
पुलिस की तफ्तीश में पता चला कि इसी साल 3 मार्च को आहूजा अस्पताल में दक्षिण अफ्रीका की एक महिला ‘अर्बिका’ का भी किडनी ट्रांसप्लांट किया गया था। इससे साफ है कि इस गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जुड़े हो सकते हैं।
कठोर कार्रवाई की तैयारी
कानपुर पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल के अनुसार पकड़े गए आरोपियों पर मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम और बीएनएस की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। इसमें दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। पुलिस अब उन सभी 11 अस्पतालों की कुंडली खंगाल रही है जो इस सिंडिकेट का हिस्सा थे।

