बिहार में निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ और मनमानी को लेकर बिहार अभिभावक महासंघ ने सभी जिला पदाधिकारियों से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है। महासंघ ने पत्र जारी कर शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और सुलभ बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
शिक्षा के नाम पर मनमानी वसूली का मुद्दा उठाया
महासंघ ने अपने पत्र में कहा है कि कई निजी विद्यालय अभिभावकों से शुल्क के अतिरिक्त किताबें, यूनिफॉर्म, जूते, बैग और अन्य सामग्रियों के नाम पर अधिक कीमत वसूल रहे हैं।
अभिभावकों को अक्सर एक ही निर्धारित दुकान से सामान खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे वे बाजार में उपलब्ध सस्ते विकल्पों का लाभ नहीं उठा पाते।
गरीब और मध्यम वर्ग पर बढ़ रहा दबाव
पत्र में इस बात पर चिंता जताई गई है कि इस व्यवस्था का सबसे अधिक असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है।
अनावश्यक खर्च के कारण अभिभावकों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
कानून का हवाला देते हुए हस्तक्षेप की मांग
महासंघ ने बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2019 और भारतीय न्याय संहिता 2023 का उल्लेख करते हुए जिला प्रशासन से आग्रह किया है कि वे अपने अधिकारों का प्रयोग कर ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाएं और आवश्यक कदम उठाएं।
महासंघ ने सुझाए प्रमुख बिंदु
महासंघ ने स्थिति सुधारने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु सामने रखे हैं:
किसी भी विद्यालय द्वारा अभिभावकों को एक ही दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने के लिए बाध्य नहीं किया जाए।
सभी विद्यालय अपनी कक्षाओं के अनुसार किताबों और यूनिफॉर्म की सूची 15 अप्रैल 2026 तक सार्वजनिक करें।
यूनिफॉर्म में कम से कम तीन वर्षों तक बदलाव न किया जाए, ताकि बार-बार खर्च से बचा जा सके।
उल्लंघन पर कार्रवाई की बात
पत्र में कहा गया है कि यदि इन बातों की अनदेखी होती है, तो संबंधित प्रावधानों के तहत विधिसम्मत कार्रवाई की जा सकती है। इसके लिए विद्यालय प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।
गोपनीय शिकायत की अपील
महासंघ ने अभिभावकों से अपील की है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा मनमानी की जा रही है, तो इसकी सूचना जिला गोपनीय शाखा को दें। शिकायतकर्ता की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाने की मांग
पत्र में जिला शिक्षा पदाधिकारियों से नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए शिकायतों की जांच करने और समय पर रिपोर्ट उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
महासंघ का यह कदम अभिभावकों के हितों की रक्षा और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

