कैश कांड मामले में नाम आने के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग की तैयारी चल रही थी। इसी बीच जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेजा है।
घर पर भारी मात्रा में नकदी के बाद विवादों में
जस्टिस वर्मा मार्च 2025 में अपने आवास पर कथित रूप से भारी मात्रा में नकदी पाए जाने के बाद से ही विवादों के घेरे में थे। जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास से 15 मार्च 2025 को 500 रुपए के जले और अधजले नोट मिले थे। इसका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। इसके बाद न्यायमूर्ति वर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे। उन्होंने आरोपों से इनकार किया और उसे साजिश बताया था। हालांकि, मामले ने तूल पकड़ा, विवाद संसद तक पहुंच गया था।
तीन सदस्यीय समिति कर रह जांच
घर पर कथित तौर पर कैश मिलने के विवाद के बाद जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी। अभी उन पर इन-हाउस जांच चल रही है। आरोपों के सिलसिले में उन्हें पार्लियामेंट्री रिमूवल प्रोसीडिंग्स की भी संभावना है। न्यायिक कार्य से उनको फिलहाल अलग किया गया था। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को उनके पद से हटाने के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है।
महाभियोग चलाने के लिए सभी दलों ने दिया था नोटिस
अगस्त में जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने के लिए सभी दलों द्वारा एक नोटिस लोकसभा स्पीकर को दिया गया था। जिसके बाद स्पीकर ने उनके खिलाफ जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। हालांकि, महाभियोग का केस चलने से पहले ही जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपना इस्तीफा राष्ट्रपति को सौंप दिया।

