अक्सर हमने पुलिस को तलाशी लेते देखा है। कई बार पुलिस सतर्कता बरतते हुए तलाशी लेती है, तो कई बार वारदात के बाद भी पुलिस को लोगों की तलाशी लेते देखा जाता है। हालांकि, बीते दिनों बिहार से एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ, जिसमें पुलिस ही अपनी तलाशी देती दिख रही है। सोशल मीडिया में वायरल वीडियो के अनुसार सोनू-मोनू गिरोह के सदस्यों ने पुलिककर्मियों की तलाशी लेने के बाद ही उन्हें घर के अंदर जांच के लिए घुसने दिया। इस मामले में बिहार सरकार के ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार ने अजीब बयान दिया है।
छापेमारी से पहले पुलिस को देनी पड़ती है तलाशी?
दरअसल हाल ही में बाढ़ में गैंगस्टर सोनू-मोनू के घर पुलिस टीम छापेमारी करने पहुंची थी। आरोप है कि घर में प्रवेश करने से पहले पुलिसकर्मियों को ही अपनी तलाशी देनी पड़ी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे। पुलिस की तलाशी को लेकर मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि नियम के तहत जब कोई किसी की तलाशी लेने जाता है, तो पहले खुद की तलाशी देनी होती है। छापेमारी के दौरान पुलिस को अपनी तलाशी देना नियम और प्रक्रिया का हिस्सा है।
पुलिस के बचाव में अजीब दलील
खुद एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (पूर्व आईपीएस) रह चुके मंत्री सुनील कुमार ने पुलिस का बचाव करते हुए दलील दी। उन्होंने कहा, ‘नियम के तहत जब कोई किसी की तलाशी लेने जाता है, तो पहले खुद की तलाशी देनी होती है। पुलिस कहीं भी रेड के लिए जाती है तो ये नियम है कि वो अपनी तलाशी देती है। जिसके घर गए हैं, उन्हें ये जानने का अधिकार है कि पुलिस के पास कोई संदिग्ध सामान तो नहीं है। जिस तरह से इस मामले को दिखाया जा रहा है, वैसी कोई बात नहीं है। अगर कोई गलत काम किया है तो कार्रवाई होगी।’
तलाशी देने के नियम के बाद भी 2 SHO को क्यों हुए सस्पेंड
इस मामले में पटना एसएसपी ने कड़ा एक्शन लेते हुए दो थानों के प्रभारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। मंत्री जी के बयान की मानें तो, अपराधियों के घर के बाहर पुलिस की तलाशी होना एक सामान्य कानूनी प्रक्रिया या नियम था, फिर पटना के सीनियर एसपी (एसएसपी) कार्तिकेय शर्मा ने 2 थाना प्रभारी को सस्पेंड कैसे कर दिया। बता दें कि पटना एसएसपी ने मामले में संज्ञान लेते हुए पंचमहला थाना प्रभारी कुंदन कुमार और हाथीदह थाना प्रभारी रंजन कुमार को घोर लापरवाही और अनुशासनहीनता के आरोप में सस्पेंड कर दिया है।
क्या है मामला?
पूरा मामला पटना से सटे बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत नौरांगा जलालपुर गांव का है। 23 मई की शाम पंचमहला थाना क्षेत्र के नौरंगा जलालपुर गांव में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद के बाद गोलीबारी हुई थी। इस मामले में स्थानीय थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले के नामजद अभियुक्तों की गिरफ्तारी और हथियार बरामदगी के लिए पुलिस टीम सोनू कुमार के घर पर तलाशी लेने पहुंची थी। कुख्यात सोनू-मोनू गैंग के घर छापेमारी करने पहुंची बिहार पुलिस को खुद अपराधियों के गुर्गों के सामने लाइन लगाकर अपनी तलाशी देनी पड़ी।

