प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार देश की महिलाओं के नाम एक पत्र लिखा। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर ये चिट्ठी लिखी है। उन्होंने ये पत्र ऐसे समय में लिखा है, जब नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के लिए 16 अप्रैल से संसद का विशेष सत्र बुलाया गया है। 16 से 18 अप्रैल तक की बैठक में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
देशभर की करोड़ों माताओं-बहनों से मांगा आशीर्वाद
पीएम नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के नाम लिखे पत्र में कहा कि 14 अप्रैल, भारत के इतिहास का बहुत महत्वपूर्ण दिन है। आज भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयंती है. समस्त देशवासी राष्ट्र निर्माण में उनके अमिट योगदान के लिए उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहे हैं। मैं भी उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। संवैधानिक मूल्यों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता हम सभी के लिए बहुत प्रेरणादायक है। संविधान ने हमें जिस समानता और समावेशी भावना का मार्ग दिखाया है, उस सर्वोच्च भावना पर चलते हुए संसद में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा होने जा रही है। संसद के आने वाले सत्र में यह संवैधानिक संशोधन पारित हो, इसके लिए मैं आप सभी, विशेषकर देशभर की करोड़ों माताओं-बहनों का आशीर्वाद चाहता हूं।
भारतीय महिलाएं नए कीर्तिमान स्थापित कर रही-पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने पत्र में लिखा कि आज भारत की महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और यह हमारे समय की सबसे सुखद तस्वीरों में से एक है। उन्होंने स्टार्टअप्स, विज्ञान, शिक्षा, खेल, कला और संस्कृति जैसे क्षेत्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है। खासकर खेल जगत में छोटे-छोटे शहरों से निकलकर भारतीय महिलाएं नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित कर रहा है।
2029 में लागू करने की आवश्यकता
संसद ने सितंबर 2023 में महिला आरक्षण कानून पास किया था। इसमें महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का नियम है। पुराने नियमों के हिसाब से यह आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता। इसका कारण यह था कि आरक्षण को जनगणना और सीटों के नए सिरे से निर्धारण (परिसीमन) की प्रक्रिया से जोड़ा गया था। अब सरकार नियमों में संशोधन कर रही है ताकि इसे 2029 के चुनाव से ही लागू किया जा सके।
सरदार पटेल की पहल को किया याद
पीएम मोदी ने कहा, सभी क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देखते हुए यह आवश्यक है कि हम विधायी निकायों में भी उनकी हिस्सेदारी बढ़ाएं। यह ऐसा विषय है जिस पर पिछले कई दशकों से व्यापक सहमति बनी हुई है। करीब सौ वर्ष पहले, जब सरदार पटेल अहमदाबाद नगरपालिका के अध्यक्ष थे, तब उन्होंने महिलाओं के लिए सीटें आरक्षित करने की पहल की थी। आजादी के बाद भारत ने पुरुषों और महिलाओं को समान मतदान का अधिकार दिया जबकि दुनिया के कई देशों में इसके लिए लंबा संघर्ष करना पड़ा।
देश की नारी शक्ति की आकांक्षाओं के साथ पूरा न्याय हो-पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, पिछले तीन-चार दशकों में विधायी निकायों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए अनेक प्रयास किए गए, लेकिन वे पूरी तरह सफल नहीं रहे। कुछ अवसर तो ऐसे आए जब हम लक्ष्य पाने के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन फिर भी हमें सफलता नहीं मिल सकी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जिस विषय पर सदैव सर्वसम्मति रही, वह आज तक अपने तार्किक निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया है। मोदी ने आगे लिखा कि हम 2047 में अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेंगे। देश, विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि आधी आबादी, यानी देश की नारी शक्ति की आकांक्षाओं के साथ पूरा न्याय हो। जब हमारी माताएं, बहनें और बेटियां नीति-निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करेंगी, तब विकसित भारत की यात्रा और अधिक सशक्त एवं तेज होगी।
महिला आरक्षण अधिनियम के बारे में
इन बदलावों के पास होने के बाद लोकसभा की कुल सीटें बढ़कर 816 हो जाएंगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगी। सरकार ने दो बड़े संशोधनों की योजना बनाई है, जिसमें एक अलग परिसीमन विधेयक भी शामिल है। महिलाओं के लिए रिजर्वेशन तय करने के लिए इन दोनों विधेयकों को संवैधानिक संशोधन के तौर पर पारित किया जाना जरूरी है। मौजूदा स्थिति को बरकरार रखते हुए, OBC आरक्षण के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जबकि SC/ST आरक्षण पहले की तरह ही जारी रहेगा। जब ‘महिला आरक्षण अधिनियम’ में संशोधन पास हो जाएंगे तो यह सुनिश्चित होगा कि लोकसभा सीटों की संख्या बढ़कर 816 हो जाएगी, जिनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

